भिलाई (श्रीकंचनपथ न्यूज़)। ये खबर उन लोगों के लिए चिंता की वजह हो सकती है, जो क्षेत्र बदलकर या फिर दूसरे क्षेत्र से चुनाव लडऩे की मानसिकता बनाकर बैठे हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से जो संकेत मिल रहे हैं वो यही है कि आगामी चुनावों के लिए आयातीत प्रत्याशी से परहेज किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसके लिए दावेदारों ने अपने-अपने स्तर पर जुगत लगाना प्रारम्भ कर दिया है।
दरअसल, भाजपा इस बार हर हाल में प्रदेश की सत्ता पर काबिज होना चाहती है। इसकी एक वजह यह भी है कि अगले साल लोकसभा के भी चुनाव होने हैं। यदि प्रदेश में सत्ता रहेगी तो लोकसभा चुनाव लडऩा और जीतना भी आसान होगा। पार्टी के नेताओं ने कई तरह की रिपोर्टों के हवाले से निष्कर्ष निकाला है कि अगला लोकसभा चुनाव छत्तीसगढ़ में भाजपा के लिए आसान नहीं रहने वाला। इसलिए पार्टी के बड़े नेताओं के लगातार छत्तीसगढ़ में दौरे चल रहे हैं। इन नेताओं ने संकेत दिया है कि इस बार विधानसभा चुनाव में हेलीकाप्टर प्रत्याशी से परहेज किया जाएगा, भले ही ऐसा प्रत्याशी कितना ही मजबूत क्यों न हो। इससे स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं में नाखुशी जैसे हालातों से भी बचा जा सकेगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि इस बार का चुनाव बिना किसी गुटबाजी या भाई-भतीजावाद के लड़ा जाए। हालांकि राजनीति के जानकारों का मानना है कि भाजपा के लिए ऐसा करना आसान भी नहीं रहने वाला।
इधर, खबर है कि दुर्ग जिले की कई सीटों पर वरिष्ठ नेता दीगर क्षेत्रों से चुनाव लडऩे की मानसिकता में हैं। विगत 2018 के चुनाव में जिले की 6 सीटों में से भाजपा के हिस्से महज एक वैशाली नगर की सीट ही आई थी। हाल ही में यहां के भाजपा विधायक विद्यारतन भसीन का निधन हो गया। इसके चलते इस सीट पर कई बड़े नेताओं की नजर बताई जा रही है। ऐसे दर्जनभर दावेदार अब तक सामने भी आ चुके हैं। इनमें कई तो इस क्षेत्र के निवासी भी नहीं है। वैशाली नगर क्षेत्र की ही बात करें तो यहां के मतदाताओं की मानसिकता स्थानीय और बाहरी वाली नहीं रही है। 2008 में परिसीमन के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में यहां से सरोज पाण्डेय ने जीत हासिल की थी, जो रिसाली क्षेत्र की निवासी हैं और उस वक्त दुर्ग शहर की महापौर थीं। उनके द्वारा अपनी विधायकी छोडऩे के बाद हुए उपचुनाव में पूर्व साडाध्यक्ष भजनसिंह निरंकारी ने जीत हासिल की थी। वे भी दुर्ग के रहने वाले थे। उसके बाद लगातार दो बार वैशाली नगर के ही श्री भसीन निर्वाचित हुए।
क्षेत्र बदलने की फिराक में
जानकार बताते हैं कि भाजपा के कई नेता क्षेत्र बदलकर चुनाव लडऩे की मंशा रखते हैं। इन नेताओं की पहली प्राथमिकता वैशाली नगर ही है। इसकी प्रमुख वजह यह बताई जा रही है कि इस क्षेत्र को भाजपा का गढ़ माना जाता है। कुल 4 विधानसभा चुनावों में से यहां 3 बार भाजपा ने जीत हासिल की, जबकि एक बार हुई पराजय भी बहुत कम वोटों से थी। 2009 में हुए उपचुनाव में भाजपा ने यहां आयातीत प्रत्याशी दिया था। हालांकि भाजपा की उस पराजय की वजह भी तब मतदाताओं की नाराजगी थी।
भावी प्रत्याशी तलाश रहे घर
जो दावेदार टिकट की प्रत्याशी में हैं, उनमें से कई लोग वैशाली नगर क्षेत्र में घर तलाश रहे हैं, ताकि आगे चलकर यह आरोप न लगे कि वे बाहरी हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने भी वैशाली नगर में हेलीकाप्टर प्रत्याशी दिया था। नतीजा यह निकला कि उसका प्रत्याशी बहुत बुरी तरह से पराजित हुआ। उस वक्त चुनाव के दौरान स्थानीय और बाहरी को ही मुद्दा बनाया गया था। जानकारों के मुताबिक, वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि उसका कैडर खुश रहे और प्रत्याशी के पक्ष में स्वस्फूर्त काम करे। यदि कैडर खुलकर काम करेगा तो भाजपा को हराना नामुमकीन होगा।




