-दीपक रंजन दास
बाबा चौपाल में ही अच्छे लगते हैं। यही भारतीय संस्कृति और परम्परा है। घर के जवान और किशोर सुबह-सुबह हल-बैल लेकर खेतों के लिए निकल जाया करते थे। दोपहर की रोटी खेत पर ही पहुंचाई जाती थी। शाम को वो थके हारे घर लौटते, भोजन करते और फिर थोड़ा वक्त परिवार के साथ बिताने के बाद विश्राम के लिए चले जाते। अगली सुबह फिर उठना जो होता था। बूढ़े और अशक्त बाबा चौपाल में बैठकर गप्पे लड़ाया करते। चिलम पीते, हुक्का गुडग़ुड़ाते, दहला पकड़ खेलकर वक्त गुजारते। बाबा परिवार की दिनचर्या में कोई दखल नहीं देते। उन्हें भी पता होता था कि धर्म-कर्म सबकुछ तभी संभव है जब रसोई में चूल्हा जले और पेट में अन्न पहुंचे। पेट भरा हो तो नींद भी अच्छी आती है और सपने भी सुन्दर होते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस संस्कृति के मर्म को समझा। उसने किसानों को मजबूत करने के प्रयास तो शुरू किये ही, महिला स्व सहायता समूहों को भी मजबूत करना शुरू कर दिया। छत्तीसगढ़ में खेती किसानी के प्रति रुझान लौटा है। गांवों में खुशहाली आ रही है और उसका असर शहरों के बाजार पर भी देखा जा रहा है। इसलिए जब छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार हिमाचल में जाकर अपनी उपलब्धियां बताती है तो लोग उनपर यकीन करते हैं। सिर्फ इतना कह देना ही काफी होता है कि अब हिमाचल की सरकार भी छत्तीसगढ़ के नक्शेकदम पर चलेगी। जिस गोबर से लोगों का अपमान किया जाता था वही गोबर पैसे भी दे सकता है और गाय-बैल की जिन्दगी भी सुरक्षित कर सकता है, यह तो किसी ने सोचा ही नहीं था। ऊपर से यही गोबर – खाद और ईंधन का भी काम करेगा, यह तो सोने पर सुहागा था। इस समय देश आर्गेनिक का दीवाना हो रहा है। यह सही समय है जब गोबर खाद और गोधन ईंधन की योजनाओं पर तेजी से अमल किया जाए। छत्तीसगढ़ का यह जादू कर्नाटक में भी चल गया। कांग्रेस मुक्त भारत अभियान चला रही भाजपा के लिये भी यह एक सबक है। भाजपा को कर्नाटक में 66 सीटों पर जीत मिली है। वहीं कांग्रेस ने 66&2+3=135 सीटों पर जीत हासिल की है। इस जीत ने राहुल के कद को बढ़ाने के साथ ही भारत जोड़ो यात्रा पर भी मुहर लगा दी है। दरअसल, बहुसंख्यक भारतीयों का पेट आज भी इतना नहीं भरा की वह धार्मिक उन्माद को प्रश्रय दे सके। वैसे भी धर्म है क्या? एक किसान के लिए अन्न, फल और सब्जियां उगाना ही उसका धर्म है। एक व्यापारी के लिए इस उत्पाद को ग्राहकों तक पहुंचाकर इसे धन में तब्दील करना ही उसका धर्म है। सेना का, पुलिस का, पुरोहितों का, शिक्षकों का यहां तक कि नेताओं का भी अपना-अपना धर्म निश्चित है। सब अपने-अपने धर्म या कर्तव्यों का पालन भली-भांति करें, तभी देश की प्रगति, लोगों की खुशहाली और सलामती सुरक्षित हो सकती है।





