नईदिल्ली (एजेंसी)। देश में पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में लिथियम का बड़ा भंडार मिला है। लिथियम के भंडार की यह पहली साइट है, जिसकी भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने रियासी जिले में पहचान की है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने 51 ब्लॉकों को राज्य सरकारों और कोयला मंत्रालय को सौंप दिया है। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में लगभग 6 मिलियन टन लिथियम का भंडार मिला है।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के सलाल-हैमाना क्षेत्र में 5.9 मिलियन टन के लिथियम अनुमानित संसाधन स्थापित किए हैं। लिथियम का उपयोग मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल कैमरा और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रिचार्बेल बैट्री में किया जाता है। इसके अलावा इसका उपयोग खिलौनों और घड़ियों के लिए भी किया जाता है। इस समय भारत लिथियम के लिए पूरी तरह दूसरे देशों पर निर्भर है। माइंस सचिव विवेक भारद्वाज ने बताया कि देश में पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी में लिथियम के इतने बड़े भंडार की खोज की गई है। आत्मनिर्भर बनने के लिए देश के लिए महत्वपूर्ण खनिजों का पता लगाना और उन्हें संसाधित करना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सोने का आयात कम किया जाता है तो हम आत्मानिर्भर बन जाएंगे।
सौंपी गई 51 खनिज ब्लॉकों की रिपोर्ट
बता दें कि 62वीं केंद्रीय भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (CGPB) की बैठक के दौरान लिथियम और गोल्ड समेत 51 खनिज ब्लॉकों पर एक रिपोर्ट राज्य सरकारों को सौंपी गई। वर्ष 2023-24 में GSI 12 समुद्री खनिज जांच परियोजनाओं समेत कुल 318 खनिज एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट पर 966 प्रोग्राम चला रहा है। खनन मंत्रालय के मुताबिक सर्वे से जुड़े 35 दस्तावेज राज्यों को सौंप दिए गए। जबकि 7897 मिलियन टन के कुल संसाधन वाले कोयला और लिग्नाइट की रिपोर्टें कोयला मंत्रालय को सौंपी गई हैं।
खनन मंत्रालय ने बताया कि इन 51 खनिज ब्लॉकों में से 5 ब्लॉक सोने से संबंधित हैं। इसके अलावा पोटाश, मोलिब्डेनम, बेस मेटल से जुड़े हुए हैं। ये मेटल्स 11 राज्यों के अलग-अलग जिलों में मिले हैं। इन राज्यों में जम्मू-कश्मीर (यूटी), आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं।




