कबीरधाम। जिले में पत्रकार की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पत्रकार अचानक घर से लापता हो गया था। लगभग 40 दिन तक पुलिस खाक छानती रही इसके बाद पता चला कि पत्रकार की हत्या कर शव को जंगल में जला दिया गया है। खासबात यह है कि हत्या का मुख्य आरोपी गांव का सरंपच निकला। हत्या के बाद सरपंच ने अपने तीन साथियों के साथ शव को ठिकाने लगाया था। शनिवार को इस सनसनीखेज मामले का खुलासा एसपी लाल उमेंद सिंह ने किया।
दरअसल पत्रकार एवं आरटीआई कार्यकर्ता विवेक चौबे 12 नवंबर 2022 को अपने घर से निकले उसके बाद वापस नहीं लौटे। इस मामले में कबीरधाम थाने में शिकायत दर्ज कराई गई उसके बाद से पुलिस उसकी तलाश करती रही । पुलिस ने सबसे पहले विवेक चौबे का मोबाइल लोकेशन सर्च किया तो 12 नवंबर को लोकेशन ग्राम कुण्डपानी थाना चिल्फी की ओर मिला। इसके बाद 13 नवंबर 2022 को उसका मोबाईल दोपहर 2 बजे बोड़ला क्षेत्र के सुकवापारा में बंद हो गया था।

इसके बाद पुलिस ने रास्तों में लगे सभी सीसी टीवी फुटेज चेक कर लिए। कई लोगों से पूछताछ की गई लेकिन कुछ पता नहीं चला। इस बीच विवेक चौबे के घर पर अनजान व्यक्ति का फोन आया उसकी इंक्वायरी की गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने उस मोबाइल धारक को पकड़ा तो पता चला कि दो व्यक्तियों ने उससे मोबाइल लेकर कॉल किया था। अब भी पुलिस के हाथ खाली लेकिन पुलिन ने अब जांच की दिशा बदली।
पुलिस ने अंतिम मोबाइल लोकेशन के आधार पर आसपास के जंगलों में तलाश की। चरवाहो से पूछताछ की गई लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चल पाया। इसके बाद अचानक एक दिन पुलिस को सूचना मिली कि धवईपानी से कुण्डपानी की ओर जाने वाले रास्ते पर फारेस्ट के पेट्रोलिंग कैम्प के अंदर जंगल पहाड़ी की ओर जले हुए राख का ढेर है, जिसमें हड्डियो के टुकड़े दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और हड्डियो के परीक्षण के लिए मेकाहारा रायपुर भेजा गया।
इसके बाद पुलिस को गुमशुदा विवेक चौबे की बोक्करखार सरपंच अमित यादव हत्या किए जाने की सूचना मिली। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने संदेही सरपंच अमित यादव और उसके साथी नंदलाल मेरावी, सुखसागर यादव एवं जगदीश धुर्वे को हिरासत में लेकर अलग अलग पूछताछ की। पूछताछ में सभी ने पुलिस को गुमराह करने का भरसक प्रयास किया लेकिन बाद में अमित यादव ने हत्या की बात मान ली।
विवाद के बाद हत्या और शव को लगाया ठिकाने
पुलिस पूछताछ में सरपंच अमित यादव ने बताया कि 12 नवंबर शाम पांच बजे पत्रकार विवेक चौबे उससे मिलने ग्राम बोक्करखार आया था। रात तक साथ में रहे। रात के समय दोनों के मध्य विवाद हुआ इसके बाद अमित यादव ने गुस्से में आकर उसे मुक्का से मारा जिससे वह अपने मोटर सायकल से गिर गया। इसके बाद विवेक चौबे उठने का प्रयास किया तो पास रखे गेड़ा से उसके पैर व सिर में जोरदार प्रहार किया जिससे वह बेहोश हो गया। सरपंच ने जब पास जाकर देखा तो पता चला कि वह मर चुका है। इससे वह घबरा कर अपने भाई सुखसागर यादव सिहत नंदलाल मेरावी और जगदीश धुर्वे को बुलाकर पत्रकार विवेक चौबे के शव को ठिकाने लगाने का प्लान बनाया।
पत्रकार विवेक चौबे के शव को गांव से दूर जंगल की ओर ले जाकर पहाड़ी में उसके शव को पास पड़े लकड़ियो के मदद से जला दिया। उसके बाद उसके मोटर सायकल को भी छिपाने के लिए अपने साथियों को बोला। जिस पर सुखसागर यादव और नंदलाल मेरावी ने मोटर सायकल को जंगल में और दूर ले जाकर गड्डा खोदा और उसमें दफन कर दिया। वहीं मोबाइल अपने पास रख लिया। फिर रातभर जंगल में रहे और सुबह अपने अपने घर लौट गए।
दूसरे दिन 13 नवंबर को अपने गांव के अन्य व्यक्ति को कवर्धा में काम है, कहकर अपने साथ लेकर आया और ग्राम कुण्डपानी, चिल्फी होते हुए बोड़ला आये वहां अमित यादव ने पत्रकार विवेक चौबे के मोबाईल से वकील को कॉल किया। ताकि पुलिस गुमराह हो जाए। अमित यादव के के बताए अनुसार की उसके साथियों ने भी यही बाते दोहराई। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पत्रकार की हडि्डयां व गड्डे में दफन मोटरसाइकिल बरामद किया।




