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अब तो अती हो गई, दुष्कर्मियों को सीधे फांसी पर लटका दिया जाए, तब कहीं बेटियों की इज्जत को बचाया जा सकता है?

By @dmin
Published: December 6, 2019
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देश का हर नागरिक चाहता है दुष्कर्मियों को हो सीधे फांसी?
संसद से लेकर राष्ट्रपति तक को चाहिए की एैसे मामलों में गंभीरतापूर्वक तत्परता दिखाए?

रायपुर। भारत देश को जहां संस्कृृति प्रधान देश कहा जाता है वहीं कई प्रबुद्ध लोगों ने अपनी वाणी में यह भी कहा है कि भारत नारी को पुजने वाली देश है। परन्तु आज की घटती हुई लगातार के घटनाओं को देखकर एैसा कहीं नहीं लगता कि ऊंपर लिखी दो लाईनें चरितार्थ होती हो? क्योंकि पिछले एक दशक से प्रतिदिन एक बात स्पष्ट रूप से सामने आती है या फिर अखबार और चैनलों की मुख्य सुर्खियां होती है कि आज फिर एक बेटी दुष्कर्मों की दरिंदगी का शिकार हो गई। कानून की लचर व्यवस्था और अपराधियों को मिलने वाले राजनैतिक संरक्षण के कारण अपराधी किस तरह अपने आप को कानून के शिंकजों से वर्षो तक बचाए रखते है। एैसे ही मामलों का उधेड़बुन करता हुआ देवेन्द्र बघेल की कलम से एक कड़वा सच…

हैदराबाद कांड की आग अभी ठंडी भी नहीं हो पाई थी कि एक आग उन्नाव में जलती हुई दिखाई दी, जहां उन्नाव के दरिंदों ने अपने पूर्व में दिए गए दुष्कर्म जैसे पाप की आग को जेल से निकलते ही पीडि़ता को जान से मारने की कोशिश की। पूरा भारत निर्भया कांड की दहशत की आग में जल रहा था। उसके आरोपियों को कानून की लचर व्यवस्था ने अब तक महफूज रखा है। कई बार फांसी देने की बारी आई लेकिन हमारी कानून व्यवस्था की कमजोर कडिय़ों ने आरोपियों को फांसी पर लटकने से बचाती रही। आज भी जब निर्भया कांड के चारो आरोपियों को फांसी में लटकाने की दिशा और दशा तय हो चुकी थी तो फिर इन्ही आरोपियों में एक ने फिर दया याचिका लगाकर फांसी की तारीख को टालने का एक प्रयास कर लिया है। जब एैसी स्थिति बन रही थी तभी हैदराबाद में एक एैसा दर्दनाक दुष्कर्म जैसा कांड हुआ, जहां आरोपियों ने पीडि़ता के साथ दुष्कर्म किया और उसे जिंदा जला दिया। इस आग की तपन अभी ठंडी नहीं हुई थी कि फिर उन्नाव कांड का नजारा देश के सामने आ गया। जमानत पर छुुटे दुष्कर्मियों ने पीडि़ता को ढूंढा और उसे जिंदा आग के हवाले कर दिया। सर्वविदित है कि इस कांड में शामिल पांच आरोपियों में दो मुख्य आरोपी वही है जिन्होंने दिसंबर 2018 में पीडि़ता के साथ दुष्कर्म किया था और वे इसी मामले पर जमानत में छुट कर आए थे। जेल से छुटते ही आरोपियों ने संगठित होकर पीडि़ता की तलाश की और गुरूवार 5 दिसंबर की अलसुबह पीडि़ता को जलाकर मार डालने का भरपूर प्रयास किया। दरिंदों के चंगुल से बचते बचाती पीडि़ता आग की लपटों के साथ लगभग 1 किलोमीटर तक दौड़ती रही और अपने आप को बचाने के लिए लोगों से गुहार लगाती रही। इस बीच अपने मोबाईल फोन के माध्यम से पुलिस को अपने साथ घटित घटना की जानकारी दी। पुलिस को जैसे ही सूचना मिली उन्होंने तत्परता दिखाई और लगभग 90 प्रतिशत जल चुकी पीडि़ता को अस्पताल पहुंचाया। जहां पांच दिसंबर की ही शाम को लखनऊ से एयरलिफ्ट कर दिल्ली भेजा गया। पुलिस इस दुष्कर्मी के आग को बुझाने के लिए पुरी चुस्ती के साथ भागदौड़ कर आरोपियों को गिरफ्तार किया और उसके पश्चात फिर वही हुआ जो देश की जनता देखना और सोच रही थी। इधर पीडि़ता ने इलाज के दौरान सब डिवीजनल मैजिस्टे्रट दयाशंकर पाठक को बताया कि मैं पांच तारीख की सुबह को अपने साथ हुए दुष्कर्म की सुनवाई के लिए रायबरेली कोर्ट जा रही थी। रेलवे स्टेशन पहुंचने के ठीक पहले हरिशंकर त्रिवेदी, रामकिशोर त्रिवेदी, उमेश बाजपेयी, शिवम त्रिवेदी और शुभम त्रिवेदी ने मुझ पर हमला किया। मेरे साथ मारपीट की गई और मुझे आग के हवाले कर दिया गया। देश की बेटियां एैसी दरिंदगी से कब तक जुझती और दुष्कर्मो का सामना करते रहेगी? आज यह सवाल देश के सामने दानवीय रूप में खड़ा हुआ है। परन्तु क्या एैसे दर्दनाक घटनाओं के पश्चात हमारे देश के बड़बोले नेताओं को बोलने का सलीखा आ जाएगा? क्या देश की सड़ी गली कानून व्यवस्था को अब सुधारा जा सकेगा? क्या बेटियां अब घर से निकलना ही बंद कर दें? या फिर अब भगवान भी बेटियों को बनाना बंद कर दें? एैसी कई बातें है जो दुष्कर्म पीडि़ता के लिए काफी दुखदायी है। वर्षो पुरानी कानून व्यवस्था को अब सुधारने की आवश्यकता है जहां आरोपियों को गिरफ्तारी के पश्चात वर्षो तक हिरासत में बचा रखा जाता है। तो क्या यह उचित है? शायद नहीं, क्योंकि पीडि़ता को जो सजा मिलनी थी वह चंद घंटों के भीतर भुगत चुकी होती है तो फिर देश का कानून खुंखार, भेडि़एनुमा दुष्कर्र्मियों को क्यों खिला पीला कर मुफ्त में पालती है। आज निर्भया कांड को 7 वर्ष व्यतीत हो चुके है लेकिन सभी आरोपी आज भी दया याचिकाओं की लचर कानून व्यवस्था के चलते अपने आप को बचाते आ रहें है। घटती हुई घटनाओं को देखकर 100 प्रतिशत सांसदों और 48 प्रतिशत जजों ने अपना यह फैसला तो सुना दिया है कि एैसे दोषियों को एक वर्ष के भीतर ही फांसी में लटका दिया जाए। तो क्या आने वाले समय में हैदराबाद और उन्नाव व बुलंदशहर जैसे शहरों में हुए दुष्कर्म के आरोपियों को एक साल के भीतर ही मौत की सजा मिल सकती है?
उन्नांव में घटित घटना के पश्चात पुलिस की चुस्ती फूर्ती दिखाई दी जिसे जनता ने भी सराहा। तेलंगाना दुष्कर्म के चारों आरोपियों का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है। शमशाबाद के डीसीपी प्रकाश रेड्डी के मुताबिक, पुलिस आरोपियों को लेकर उस अंडरब्रिज पर पहुंची थी, जहां उन्होंने डॉक्टर को कैरोसिन डालकर जलाया था। पूछताछ और घटना को रीक्रिएट करने के दौरान आरोपी पुलिस के हथियार छुड़ा कर भागने लगे। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग की। आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें चारों आरोपी मारे गए। साइबराबाद पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनर ने बताया कि चारों आरोपी शुक्रवार तड़के 3 से 6 बजे के बीच शादनगर स्थित चतनपल्ली में एनकाउंटर में मारे गए। एक वरिष्ठ पुलिस अफसर ने कहा कि घटना में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
एनकाउंटर की खबर मिलने के बाद पीडि़त के पिता ने कहा- हमारी बच्ची को मरे हुए 10 दिन हो गए। तेलंगाना सरकार, पुलिस और जो लोग मेरे साथ खड़े थे, उन्हें बधाई। वहीं, पीडि़ता की बहन ने कहा कि आरोपी एनकाउंटर में मारे गए। मैं इससे काफी खुश हूं। यह एक उदाहरण होगा, उम्मीद है आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा। मैं पुलिस और तेलंगाना सरकार को शुक्रिया कहना चाहती हूं।
तेलंगाना के कानून मंत्री ए इंद्राकरण रेड्डी ने एक न्यूज चैनल से कहा- भगवान ने कानून से पहले सजा दे दी आरोपियों को। उनके साथ जो हुआ उससे पूरा हिंदुस्तान खुश है। टीवी में हमने देखा कि आरोपी पुलिस के हथियार लेकर भागने की कोशिश कर रहे थे। जो हुआ अच्छा हुआ।

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