-दीपक रंजन दास
गांधीगिरी एक वैश्विक स्तर पर आजमाया हुआ उपकरण है. इसका जवाब न तो अंग्रेजों के पास था और ही देश की किसी सरकार के पास कभी हुआ है. नाच-गाने की महफिल को अगर श्रोता और दर्शक न मिलें तो पांव खुद-ब-खुद थकने लगते हैं, सुर ताल बिगडऩे लगता है. कुछ ऐसा ही हो रही है छत्तीसगढ़ में भाजपा के साथ. पिछले एक सप्ताह के दौरान उसने खूब हंगामा मचाया. एक से बढ़कर एक मुद्दा उछाला पर कोई तूफान आना तो दूर, सामान्य हलचल भी नहीं हुई. शासन प्रशासन शांति के साथ यह नौटंकी देखता रहा. कोई प्रतिक्रिया नहीं की. सोशल मीडिया भी लगभग शांत ही रहा. अखबार भी खबर छापकर शांत हो गए. आम जनता सरकारी दफ्तरों की हड़ताल से हलाकान होती रही. पर यह छत्तीसगढ़ है जनाब, लोगों के पास असीम धैर्य है. यह उनकी धीरज ही है कि वह किसी भी, कैसी भी सरकार को दो-तीन पारी खेलने का मौका दे देती है. नई सरकार का तो अभी एक भी कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है. वहीं जिनकी रोजी रोटी ही राजनीतिक समीक्षा से चलत है वे मजबूरन कुछ न कुछ कह रहे हैं, लिख पढ़ रहे हैं. वे कयास भी लगा रहे हैं कि इन आंदोलनों का अगले साल के चुनाव पर क्या असर पडऩे वाला है. साहब! अपने यहां पब्लिक की याददाश्त बहुत कमजोर है. नवरात्रि के बाद लोगों से पूछ लेना कौन सा आंदोलन किस लिए हुआ था तो जवाब नहीं मिलेगा. खुद भाजपा के नेता मान रहे हैं कि यह आंदोलन समय से बहुत पहले छेड़ दिया गया. दो-तीन महीने में यह अपनी मौत खुद मर जाएगा. उन्हें यह बात भी अखर रही है कि तरकश के अधिकांश तीर चलाए जा चुके हैं. दरअसल यह पूरा मामले जबरदस्ती विरोध की राजनीति का है. यदि किसी को छत्तीसगढ़ की परवाह होती तो वह सरकार के कामकाज में रचनात्मक सहयोग करती. वह गलतियों, खामियों और चूकों की तरफ सरकार का ध्यान आकर्षित करती. इस तरह राशन पानी लेकर रायपुर चलो, सीएम हाउस घेरो जैसे उपद्रव नहीं करती. उन्होंने तो सोचा था कि पुलिस के साथ झोल-झपाटा करेंगे, एक-आध तमाचा जड़ देंगे तो पुलिस आपे से बाहर हो जाएगी. पुलिस आपे से बाहर हो जाएगी तो हाथापाई और बलप्रयोग होगा. बलप्रयोग होगा तो क्या पता लाठी चालन, वाटर कैनन या गोली चलाने की ही नौबत आ जाए. फिर इतना बड़ा हंगामा खड़ा होता कि सरकार को कोई वाकई खतरा हो जाता. पर यहां भी किसी ने कच्ची गोलियां नहीं चबाई हैं. नेतागिरी का यह ककहरा भाजपा ने भी कांग्रेस से ही सीखा है. लिहाज भूपेश सरकार ने गांधीगिरी का रास्ता चुना. आप हंगामा करो, हम देख रहे हैं. चुन-चुन कर लोगों के नाम लिखे जा रहे हैं, वीडियो फुटेज संभाले जा रहे हैं. ऐन वक्त पर ऐसा दबोचेंगे कि पार्टी के पास चूं करने वाले भी न बचेंगे. साउथ का हीरो केवल फिल्मों में ही पांव घुमाकर बवंडर उठा सकता है, हकीकत के धरातल से इसका कोई लेना देना नहीं.





