-दीपक रंजन दास
हर पद की एक गरिमा होती है, एक मर्यादा होती है. व्यक्ति को अपने पद और मर्यादा के अनुसार आचरण करना होता है. पर 75 साल के भारत में मर्यादा का पालन वही कर पाते हैं जिनके पेट भरे हुए हैं. जिनका भविष्य सुरक्षित है. जिनके पास मोटी रकम का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा है. शेष लोगों के लिए मर्यादा का पालन करना कठिन होता है. उन्हें गुस्सा आता है, खीझ होती है तो वो अपना आपा खो देते हैं. मुंह में राम बगल में छुरी जितना धैर्य उनके पास नहीं होता. वो गालियां बकते हैं, श्राप देते हैं. यह और बात है कि न तो गालियों से किसी का कुछ बिगड़ता है और न ही इस घोर कलियुग में किसी का श्राप फलीभूत होता है. पर दिक्कत यही है कि यह सब जानते हुए भी लोग प्रतिक्रिया करते हैं. झगड़े मोल लेते हैं और गुस्से में खुद अपना ही अहित कर बैठते हैं. अपने भारत में ये दोनों दो अलग-अलग वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं. पिछले कुछ सालों में इन दोनों वर्गों का राजनीतिक ध्रुवीकरण हो गया है. एक वर्ग को लगता है कि राज करना, शासन करना उनका अधिकार है. दूसरा वर्ग लोगों के बीच रहकर उनके लिए काम करना चाहता है. यही कारण है कि देश भर में बवाल के बाद भी न तो दिल्ली की आप सरकार का कुछ बिगड़ा और न ही अब छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार का कुछ बिगड़ता दिखता है. छत्तीसगढिय़ा वाद की ऐसी बयार यहां चली है कि अन्य सभी मुद्दे तिनके की तरह उड़ गए हैं. और क्यों न हो? छत्तीसगढ़ का अपना गौरवशाली अतीत है. यहां गुलामी की जंजीरों को तोडऩे की कोशिशें 1857 से भी पहले शुरू हो चुकी थीं. यहां की आदिवासी जनता ने कभी भी किसी की भी गुलामी को नहीं सहा. नदी, पर्वत, झरने, खनिज और मीलों फैले धान के खेत इसे धरती का स्वर्ग बनाते हैं. यहां की अपनी समृद्ध परम्परा है. खान-पान, रहन-सहन की सादगी और जीवन के उच्च आदर्श यहां की संस्कृति का अटूट हिस्सा है. छत्तीसगढ़ ने अपनी गोद में सभी को स्थान दिया पर इनमें से कुछ ही लोग इस धरती की मर्यादा को पूरी तरह जी पाए. शेष लोगों ने कभी यहां की भाषा-बोली सीखने की कोशिश नहीं की, यहां के व्यंजनों का लुत्फ नहीं उठाया. यहां के संस्कारों पर गर्व नहीं किया. वे खुद को छत्तीसगढिय़ा बोल तो सकते हैं पर गेड़ी नहीं चढ़ सकते, भौंरा नहीं चला सकते, फुगड़ी नहीं कर सकते. इसलिए अब वे तेजस्वी सूर्या को लेकर आए हैं. साउथ की फिल्में लोगों का खूब मनोरंजन करती हैं. साउथ का हीरो जब जमीन पर पैर मारता है तो धरती हिल जाती है, जब पैरों को घुमाता है तो बवंडर उठता है, एक ठूंसा मारता है तो आदमी उडऩे लगता है. वह लोगों का मनोरंजन कर रहा है और पार्टी मुख्यमंत्री को मर्यादा का पाठ पढ़ा रही है.





