-दीपक रंजन दास
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू बिना लाग लपेट के अपनी बात सपाट ढंग से कहने के लिए भी जाने जाते हैं. भूपेश सरकार के तेवरों पर वे एकदम फिट बैठते हैं. वैसे भी माना जाता है कि हमेशा डिफेंसिव होना, कमजोरी की निशानी होती है. इसलिए कभी-कभी गुरुजी की मुद्रा में आ जाना चाहिए. भूपेश सरकार के मंत्री फिलहाल इसी मोड में हैं. नए-नए भाजपा अध्यक्ष बने अरुण साव उनके हत्थे चढ़ गए. राम भरोसे चल रही भाजपा की पार्टी लाइन को फॉलो करते हुए साव झोंक में कह गए कि राम और कृष्ण तो सबके हैं पर कांग्रेसियों के नहीं हो सकते. गृहमंत्री कहां चूकने वाले थे. उन्होंने साव को नौसिखिया बताते हुए कहा कि अभी एक ही हफ्ता हुआ है, परिपक्वता नहीं आई है. साथ ही खुला चैलेंज दे दिया कि नवरात्रि पर भाजपा और कांग्रेस के पंडाल गिनवा लें. घर-घर सर्वे करवा लें तो श्रीराम और तुलसी, कांग्रेसियों के घर ही ज्यादा मिलेंगे. प्रभु श्रीराम तब भी घट-घट में थे जब भाजपा या कांग्रेस का जन्म नहीं हुआ था. ऊपर से छत्तीसगढ़ तो श्रीराम का ननिहाल है. श्रीराम यहां परिवार के सदस्य हैं. उन्हें भांजा माना जाता है. छत्तीसगढ़ में इसीलिए भांजे के पांव पूजे जाते हैं. यहां रामनामी समुदाय भी है जो अपने शरीर पर राम नाम का अक्षय गोदना गुदवाते हैं. यहां कौशल्या माता का मंदिर है. राम वन गमन पथ है. माता शबरी की विरासत है. यही बात गौमाता के बारे में भी कही जा सकती है. शेष भारत में भले ही लोग नमस्ते, प्रणाम और सुप्रभात कहते हों, यहां जब भी लोग मिलते हैं छोटे-बड़े सभी को “राम-राम” कहते हैं. छत्तीसगढिय़ों को राम की परिभाषा किसी और से सीखने की जरूरत नहीं है. कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में गौमाता भी सदियों से परिवार का हिस्सा है. आधुनिक खेती किसानी ने गाय और बैलों को भले ही नेपथ्य में भेज दिया था पर गोधन न्याय योजना चलाकर भूपेश सरकार ने उसकी महत्ता दोबारा स्थापित कर दी है. अब बारी प्रभु श्रीराम पर निर्णायक फैसले की है. भाजपा भूल रही है कि रामजी सभी का भला करते हैं. श्रीराम की भाजपा पर विशेष कृपा रही है. उन्हीं की कृपा से लोकसभा में 2 सीटों वाली पार्टी 85 सीटों तक पहुंची और आज देश की सबसे बड़ी पार्टी है. यहीं आकर पार्टी खता खा गई. पुरुषोत्तम श्रीराम त्याग, बलिदान, पुरुषार्थ और विनम्रता के प्रतीक हैं. पिता के वचन के लिए राजपाट का त्याग कर सकते हैं, जनभावना के सम्मान में पत्नी वियोग सह सकते हैं, बिना सेना के त्रिलोक विजयी रावण को चुनौती दे सकते हैं तो धराशायी रावण को प्रणाम भी कर सकते हैं. कहते हैं श्रीराम दिल में हों तो व्यक्ति सदाचारी, परोपकारी होता है. पर राम का नाम सत्य है, इसका अनुभव तो तभी होता है जब …
गुस्ताखी माफ: भाजपा को नवरात्रि पंडाल गिनने की चुनौती




