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छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चावल निर्यात को प्रोत्साहन देने का असर: मंडियों में समर्थन मूल्य से भी ज्यादा मूल्य पर बिक रहा ग्रीष्मकालीन धान

By @dmin
Published: August 17, 2022
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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप राज्य के किसानों के हित में चावल निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए मंडियों में धान के क्रय से मंडी शुल्क एवं किसान शुल्क पर पूर्णत: छूट देने के निर्णय के फलस्वरूप किसानों को ग्रीष्मकालीन धान के विक्रय पर प्रति क्विंटल 250-300 रूपए अधिक कीमत मिलने लगी है। मंडियों में ग्रीष्मकालीन धान समर्थन मूल्य से भी ज्यादा कीमत पर किसान बेच रहे है। वर्तमान में मंडियों में ग्रीष्मकालीन धान 1800-1950 रूपए प्रति क्विंटल की दर पर बिक रहा है, जिसका सीधा लाभ राज्य के किसानों को मिल रहा है। रबी सीजन के धान का विक्रय किसानों द्वारा मंडियों में किया जाता है। बीते वर्ष मंडियों में रबी सीजन का धान 1600 से 1650 रूपए कीमत बिका था।

गौरतलब है कि राज्य शासन द्वारा चावल के निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए मंडियों के माध्यम से क्रय धान से प्रसंस्कृत चावल के निर्यात पर 12 जुलाई 2022 से मंडंी शुल्क एवं कृषक कल्याण शुल्क पर पूर्णत: छूट प्रदान की गई है, जिसके फलस्वरूप विक्रेता कृषकों को रबी फसल धान की कीमत समर्थन मूल्य से भी अधिक लगभग 1800 से 1950 रू. प्राप्त हो रही है। इस साल 22 जुलाई से 15 अगस्त 2022 की अवधि में प्रदेश के मंडियों में कृषकों द्वारा लगभग 18 लाख 53 हजार क्विंटल धान का क्रय-विक्रय किया गया है। विक्रेता कृषकों को बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष 250 से 300 रूपए प्रति क्विंटल की दर से लगभग 55 करोड़ 90 लाख रूपए की राशि अधिक प्राप्त हुई है, जिसका सीधा लाभ राज्य के 92 हजार 650 कृषकों को मिला हैं। छत्तीसगढ़ शासन किसान हितैषी नीतियों के चलते बीते साढ़े तीन वर्षों में किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। रबी धान की कीमत अधिक मिलने से किसान प्रसन्न है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में कृषि को समृद्ध और किसानों को खुशहाल बनाने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं। किसानों के ऊपर बकाया 9270 करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण और 244 करोड़ रूपए सिंचाई कर की माफी की गई। राज्य में फसल उत्पादकता एवं विविधिकरण को बढ़ावा देने के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किसानों को अब तक 12 हजार 920 करोड़ रूपए की इनपुट सब्सिडी देने के फलस्वरूप राज्य में खेती-किसानी के प्रति रूझान बढ़ा है। राज्य में धान उत्पादक किसानों और धान की उत्पादकता में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है। खरीफ धान की राज्य में समर्थन मूल्य पर खरीदी की बेहतर व्यवस्था और किसानों द्वारा बेचे गए धान के एवज में तत्काल भुगतान के चलते साल दर साल धान की रिकार्ड खरीदी हो रही है। बीते खरीफ विपणन वर्ष में 98 लाख मेट्रिक टन धान की खरीदी समर्थन मूल्य पर कर किसानों को 19 हजार करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान किया गया।

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