-दीपक रंजन दास
देश में आजादी का अमृत महोत्सव चल रहा है। स्कूल-कालेजों में अमर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों पर कार्यक्रम हो रहे हैं। सरकारी कालेजों-दफ्तरों में देश के सपूतों की तस्वीरें लगी होती हैं। सरकारी स्कूलों की तो दीवारों पर भी पेंट की सहायता से स्वाधीनता सेनानियों और महापुरुषों के चित्र उकेरे जाते हैं। पर यहां जो हुआ वह इन सबसे अलग है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के गंज थाने में एक फोटो गैलरी का उद्घाटन किया गया। आम तौर पर फोटो गैलरी में कलात्मक चित्र या प्रेरक तस्वीरें लगाई जाती हैं पर इस गैलरी इससे अलग है। यहां आदतन अपराधियों की फोटो लगी है। डकैती, लूट और चोरी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले इन शूरवीरों की डेढ़ सौ से ज्यादा तस्वीरें इस गैलरी में प्रदर्शित की गई है। अब अपराधी शान से कह सकेंगे कि उनकी तस्वीरें पुलिस की फोटो गैलरी में लगी हुई है। पुलिस का कहना है कि इससे छत्तीसगढ़ सहित दीगर राज्यों की पुलिस को इन अपराधियों की पहचान करने में सहूलियत होगी। 150 लोगों की कुण्डली का डिजिटल रिकार्ड रखना शायद बहुत मुश्किल था। बताते हैं कि देशभर की पुलिस एक नेटवर्क से जुड़ी हुई है। काफी समय से इसपर काम चल रहा है। देश-दुनिया के किसी भी कोने में बैठा आदमी इसके वेबसाइट को एक्सेस कर अपराधियों की पूरी जानकारी हासिल कर सकता है। क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) चूंकि डिजिटल प्लेटफार्म है इसलिए यहां लाखों अपराधियों की पूरी कुण्डली रखी जा सकती है। चुटकियों में उसे सर्च किया जा सकता है। उसकी कॉपी सेव की जा सकती है। प्रिंटआउट लिया जा सकता है। तो फिर इस फोटो गैलरी की जरूरत क्यों पड़ी? अब तक रेल्वे स्टेशनों और बस अड्डों में पाकेटमारों, जहरखुरानों और ठगों की तस्वीरें चिपकाई जाती रही हैं। थाने में आदतन अपराधियों और गुमशुदा लोगों की फोटो नोटिस बोर्ड पर चस्पा करने का रिवाज है। अब तो लोगों ने इनपर ध्यान देना भी बंद कर दिया है। इसलिए इस क्षेत्र में भी नवोन्मेष की जरूरत थी। नई गैलरी बनने के बाद कम से कम एक बार तो लोग उसे गौर से देखेंगे और पढ़ेंगे। कुछ लोगों की तस्वीर देखकर तो शायद मोहल्ले वाले भी दांतों तले उंगलियां दबा लें। भिलाई-3 पुलिस ने भी इसी तरह का एक नवोन्मेष किया था। उसने उन वारंटियों का फ्लेक्स थाने के सामने प्रदर्शित कर दिया था जो समन की खिल्ली उड़ाते थे। इसका व्यापक असर हुआ था। रसूखदारों की सार्वजनिक बेइज्जती हो रही थी। अब एक काम और करे पुलिस – फ्रॉड जमीन दलालों और पोंजी स्कीम के ठगों की तस्वीरों के भी कोलाज बनवा ले और इन्हें चौक चौराहे पर लगवा दे। इन्हें पहचानना डकैतों को पहचानने से ज्यादा जरूरी है। लोग ठगे नहीं जाएंगे तो माथा भी नहीं सटकेगा और कुछ अपराध कम हो जाएंगे।
गुस्ताखी माफ: अपराधियों की फोटो गैलरी




