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गुस्ताखी माफ: पानी का यह आकर्षण

By @dmin
Published: July 7, 2022
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गुस्ताखी माफ: भाजपा के गढ़े हुए मुद्दे, आयातित नेतृत्व
गुस्ताखी माफ: भाजपा के गढ़े हुए मुद्दे, आयातित नेतृत्व
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-दीपक रंजन दास
बरसाती नाला हो या पहाड़ी झरना, कृत्रिम तरणताल हो या समन्दर का किनारा, बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है। पानी जहां जीव मात्र के लिए जीवनधारण की आवश्यकता है वहीं इंसानों को यह मानसिक सुकून भी देता है। पर यही पानी तब अकालमृत्यु का कारण भी बन जाता है जब हम इसके प्रति लापरवाह हो जाते हैं। प्रति वर्ष हजारों लोगों की मृत्यु डूबने से हो जाती है। इसमें सबसे बड़ी संख्या युवाओं की होती है जो नहाने के लिए बरसाती नालों में, नहरों में या नदियों में छलांग लगा देते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण पूर्व एशिया में 2019 के दौरान 70 हजार लोगों की मौत डूबने से हुई। इनमें से 15 फीसद की उम्र 15 साल से कम थी और वे सभी बालक थे। अर्थात यह मौतें किसी बाढ़ या प्राकृतिक आपदा की वजह से नहीं हुई थीं। एक्सेडेंटल डेथ्स एंड सुईसाइड्स इन इंडिया द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक अकेले भारत में 2018 के दौरान प्रतिदिन औसतन 83 लोगों की मृत्यु डूबने से हुई। 30,187 मौतों के इस आंकड़े को भी वे कम मानते हैं क्योंकि ग्रामीण तथा वनांचलों में होने वाली ऐसी मौतों की आम तौर पर रिपोर्टिंग नहीं होती। इनमें से अधिकांश लोग नहाने गए थे। नहाना जरूरत होने के साथ-साथ एक शौक भी है। यह शौक कुछ इस तरह सिर चढ़कर बोलता है कि लोग सुबह नहीं नहाने वालों को हिकारत की नजर से देखते हैं। भारतीय समाज में सुबह सुबह नहाने की एक परम्परा पीढिय़ों से चली आ रही है। नहाते समय डूबने से मौत के मामलों को छोड़ भी दें तो भी यह कई अन्य मुसीबतों की भी जड़ है। लोग नहाने के चक्कर में स्कूल, कालेज और दफ्तर देर से पहुंचते हैं। सुबह-सुबह टंकी के ठंडे पानी से नहाने के चक्कर में प्रतिवर्ष हजारों लोग शॉक और स्ट्रोक के शिकार होते हैं। इसी से जुड़ा है गर्म पानी से नहाने का चलन। शहरों में जहां गीजरों का खूब चलन है वहीं गांवों में भी पानी गर्म करके सुबह-सुबह नहाने का चलन है। महाराष्ट्र में तो नहाने का पानी गर्म करने के अलग से बर्तन भी आते हैं जिसमें दिन भर पानी गर्म होता रहता है। स्नान के विज्ञान की बात करें तो सामान्य मौसम में सप्ताह में दो बार नहाना पर्याप्त होता है। स्नान को लेकर समझदार लोगों का मानना है कि स्नान हमेशा शाम या रात को करना चाहिए। इस समय टंकी का पानी ज्यादा ठंडा नहीं होता। दूसरे दिन भर के धूल-धक्कड़ और पसीने से निजात पाने के लिहाज से भी यह बेहतर होता है। रात को नहाने पर भूख और नींद दोनों अच्छी होती है। सुबह व्यक्ति तरोताजा उठता है। नहाने में मजा कितनी भी आए, नहाने को लेकर दृष्टिकोण को वैज्ञानिक बनाना खुद अपनी सेहत के लिए अच्छा होता है।

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