एसएसबी की मौजूदगी से रावघाट रेल परियोजना को मिला जीवनदान
भिलाई। बीएसपी की लाइफलाइन रावघाट प्रोजक्ट में पिछले 8 साल में एसएसबी की वजह से कई उपलब्धियां जुड़ गई। दल्लीराजहरा से रावघाट तक 95 किलोमीटर में अब तक 55 किलोमीटर से ज्यादा का काम पूरा हो चुका है। अंतागढ़ से आयरन शिफ्ट करने का काम भी शुरू हो चुका है। इन आठ साल में सशस्त्र सीमा बल और अन्य सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने माओवादियों को भागने मजबूर कर दिया।

2014 में पहली बार जब एसएसबी की बटालियन अंतागढ़ क्षेत्र में पहुंची तो रेल लाइन का काम एक इंच भी नहीं सरका था, लेकिन महज आठ साल में ही एसएसबी ने अपनी मौजूदगी के साथ ही आरवीएनएसल को कड़ी सुरक्षा प्रदान की। जिसके बाद काम में लगातार तेजी आने लगी।

यह बातें एसएसबी सेक्टर हेडक्वार्टर के कमांडेंट अशोक ठाकुर ने श्रीकंचनपथ से खास बातचीत में कही। उन्होंने स्थापना दिवस पर एसएसबी के इतिहास को भी बताया। कमाडेंट श्री ठाकुर ने बताया कि 1962 में जब चीन की लड़ाकी के बाद चीन के सीमावर्ती क्षेत्र के नागरिकों भय का माहौल व्याप्त हो गया था. इसी दौरान भारत सरकार ने 1963 में विशेष सेवा ब्यूरो का गठन किया।

बल का प्राथमिक उद्देश्य चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का मुकाबला करना था। इसी दौरान 1963 में एक अद्वितीय बल बनाया गया जो भारत और चीन सीमा पर तैनात होकर भारतीय सेना को भी मदद करें। यह एसएसबी का शुरुआती दौर था। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली में सुधार स्वरूप मंत्रीमंडल की सिफारिशों के बाद जून 2001 में एसएसबी को भारत-नेपाल सीमा के लिए बॉर्डर गार्डिंग फोर्स के रूप में घोषित किया गया था। जिनको नेपाल से लगी 1751 किमी सीमा की सुरक्षा का काम सौंपा गया था और साथ-साथ 2004 से 699 किमी भारत भूटान सीमा की रखवाली का काम भी सौंपा गया था।

2003 में बदला नाम
कमाडेंट अशोक ठाकुर ने बताया कि स्पेशल सर्विस ब्यूरो का नाम बदलकर 2003 से एसएसबी को सशस्त्र सीमा बल के नाम से जाने जाना लगा। केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों के संसाधनों को समाहित कर सशस्त्र सीमा बल ने सीमावर्ती गांवों में कई विकास के काम कराए और उनका विश्वास जीता। साथ ही उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा भी उपलब्ध कराई। वही अरुणाचल प्रदेश में हिन्दी के प्रचार का श्रेय एसएसबी को जाता है। एसएसबी, जम्मू और कश्मीर में काउंटर इंसजेंसी ऑपरेशन और झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों में भी अपना योगदान दे रही है।






