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एसईसीआर के 383 किलोमीटर का सेक्शन ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली से लैस, कोरबा – गेवरा रोड के बीच भी लगा सिस्टम

By Mohan Rao
Published: November 10, 2023
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रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे यात्रियों के बेहतर, सुविधाजनक, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।  यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने के साथ-साथ क्षमता में वृद्धि के लिए आधुनिक एवं उन्नत तकनीक को अपनाया जा रहा है। इसी क्रम में अब स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली यानी ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑटोमेटिक ब्लॉक सिगनलिंग सिस्टम में दो स्टेशनों के निश्चित दूरी पर सिग्नल लगाए जाते हैं।

नई व्यवस्था में स्टेशन यार्ड के एडवांस स्टार्टर सिग्नल से आगे लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर पर सिग्नल लगाए गए हैं। जिसके फलस्वरूप सिग्नल के सहारे ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे चलती रहती है। अगर किसी कारण से आगे वाले सिग्नल में तकनीकी खामी आती है तो पीछे चल रही ट्रेनों को भी सूचना मिल जाएगी।  जो ट्रेन जहां रहेंगी और वो जहां है वहीं रुक जाएंगी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में बिलासपुर से दाधापारा, बिल्हा, गतौरा, जयरामनगर, लटिया, अकलतरा, उसलापुर, घुटकू, चांपा से गेवरा रोड , नागपुर से भिलाई के साथ कुल  383  किलो मीटर सेक्शन ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली से लैस है । कोरबा से गेवरा रोड के कार्य पूरे होने से चांपा से गेवरा रोड तक का पूरा सेक्शन ऑटो सिग्नलिंग से लैस हो गया।

ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल सिस्टम के लागू हो जाने से एक ब्लॉक सेक्शन में एक  ही रूट पर एक से अधिक ट्रेनें चल सकती है।  इससे रेल लाइनों पर ट्रेनों की रफ्तार के साथ ही संख्या भी बढ़  गई है। वहीं, कहीं भी खड़ी ट्रेन को निकलने के लिए आगे चल रही ट्रेन के अगले स्टेशन तक पहुंचने का भी इंतजार नहीं करना पड़ता है।  स्टेशन यार्ड से ट्रेन के आगे बढ़ते ही ग्रीन सिग्नल मिल जाता है, यानि कि  एक ब्लॉक सेक्शन में एक के पीछे दूसरी ट्रेन आसानी से चलती है। इसके साथ ही ट्रेनों के लोकेशन की जानकारी मिलती रहती है। 

नागपुर से भिलाई 279 किलोमीटर, बिलासपुर – अकलतरा  के मध्य 27 किमी, बिलासपुर – बिल्हा के मध्य 16 किमी एवं बिलासपुर – घुटकू के मध्य 16 किमी, चांपा से गेवरा रोड 45 किलोमीटर  जैसे  रेल खंडो में आटोमेटिक सिग्नल प्रणाली लागू की गई है। साथ ही कई महत्वपूर्ण रेलखंडों में इस प्रणाली को स्थापित करने का कार्य तेजी से चल रहा है। ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली लागू हो जाने से बहुआयामी लाभ रहा है। लागत की दृष्टि से  यह कम खर्चीला है। पहले कॉपर के केबल लगाये जाते थे जिसमे लागत ज्यादा आती थी। अब ऑप्टिकल फाईबर केबल लगाये जा रहे है जिसकी लागत भी कम होती है एवं इसके चोरी होने का भी भय नही रहता है।  यह रिंग प्रोटेक्टेड केबल होते है जो जल्द खराब भी नहीं होते। इस प्रकार से दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे के सभी महत्वपूर्ण रेल खंडों मे इस प्रकार की ऑप्टिकल फाईबर केबल के साथ आटोमेटिक सिग्नल प्रणाली लागू करने की योजना है, जिससे कि कम लागत मे ज्यादा आउटपुट की प्राप्ति हो साथ ही साथ ही ट्रेनों की गति में भी वृद्धि हो।

संरक्षित ट्रेन संचालन में सिग्नलिंग सिस्टम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।  रेलवे में उपयोग में आने वाले उपकरणों का उन्नयन और प्रतिस्थापन एक सतत प्रक्रिया है, जिसे आवश्यकताओं के अनुरूप संसाधनों की उपलब्धता एवं परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर किया जाता है।  समय समय पर ट्रेन संचालन में संरक्षा को और बेहतर बनाने तथा लाइन क्षमता में बढ़ोतरी के उद्देश्य से सिग्नलिंग सिस्टम का आधुनिकीकरण किया जाता है, इसी कड़ी में ट्रेनों की गति तेज करने और सुरक्षित सफर के लिए सिग्नल सिस्टम को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य प्रारंभ कर दिया गया है । इस सिस्टम में वर्तमान आधारभूत संरचना के साथ रेलवे लाइन की क्षमता बढ़ जाएगी।

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