कांग्रेस पूरे दमखम के साथ मैदान मारने को तैयार, भाजपा भी चुनौती देने में नहीं छोड़ेगी कोई कोर-कसर
भिलाई। नगरीय निकाय के लिए चुनाव तारीखों का ऐलान होते ही राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई हैं। दुर्ग जिले के 3 नगर निगमों समेत एक पालिका क्षेत्र में मतदान होना है। यहां न केवल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू बल्कि केबिनेट मंत्री रूद्रकुमार गुरू व प्रदेश सरकार की साख भी दांव पर है। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को प्रदेश में नंबर एक और दो माना जाता है और दुर्ग जिला इन दोनों नेताओं का घर है। ऐसे में जिले के कुल 170 वार्डों के नतीजों पर सबकी निगाहें होगी। इससे कांग्रेस और प्रदेश सरकार की भविष्य की राजनीति भी काफी हद तक स्पष्ट होगी। यही वजह है कि सत्तारूढ़ दल दुर्ग जिले की फतह पर ज्यादा जोर लगा रहा है।

भले ही यह माना जाता हो कि स्थानीय चुनाव के नतीजे ज्यादातर सत्तारूढ़ दल के पक्ष में आते हैं। बावजूद इसके कांग्रेस जीत का परचम लहराने के लिए पूरा दमखम दिखाने को तैयार है। वहीं विपक्षी दल भाजपा भी कोई कोर कसर नहीं छोडऩा चाह रही है। पिछले दो महीनों में पार्टी के नेताओं ने प्रदेशभर में जिस तरह से सक्रियता बढ़ाई है, उसके बाद यह लगने लगा है कि भाजपा इन चुनावों को अवसर से ज्यादा भविष्य का संकेत मान रही है। इधर, चुनावी शंखनाद होते ही दावेदारों ने गली-मोहल्लों की खाक छानना शुरू कर दिया है। हालांकि कांग्रेस में टिकट के दावेदार कश्मकश में दिख रहे हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि पार्टी की टिकट मांगने के लिए उन्हें किसके शरणागत होना है। यही वजह है कि उन्हें कभी विधायक तो कभी जिलाध्यक्ष के दरबार में हाजिरी लगानी पड़ रही है। कई लोग मुख्यमंत्री के करीबियों के इर्द-गिर्द भी मंडरा रहे हैं। कमोबेश ऐसी ही स्थिति भाजपा के साथ भी है। यहां जिला संगठन की कमान राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय गुट के पास है। इसलिए लोकसभा सांसद विजय बघेल और पूर्वमंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय के समर्थकों में उहापोह के हालात है। भाजपा में संगठन का महत्व ज्यादा होता है। इस लिहाज से सरोज पाण्डेय गुट का पलड़ा टिकट वितरण के दौरान भारी रहने की संभावना है। यही वजह है कि सरोज गुट के विरोधी लोग टिकट न मिलने की स्थिति में निर्दलीय ही खम ठोंकने की बात कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो भाजपा की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
उल्लेखनीय है कि जिले के 3 नगर निगमों- भिलाई, रिसाली व भिलाई-चरोदा के साथ ही नगर पालिका परिषद जामुल क्षेत्र में चुनाव होने हैं। पिछली दफा भिलाई नगर निगम में कांग्रेस के महापौर देवेन्द्र यादव थे, जो वर्तमान में इसी क्षेत्र से विधायक हैं। वहीं भिलाई चरोदा नगर निगम भाजपा के कब्जे में था। वहां चंद्रकांता मांडले के रूप में महिला महापौर थी। जबकि जामुल नगर पालिका में कांग्रेस की सरोजिनी चंद्राकर अध्यक्ष थीं। इन सभी निकायों का कार्यकाल खत्म हो चुका है और अब तक यहां प्रशासक ही कामकाज निपटा रहे थे। अलबत्ता, रिसाली नगर निगम में पहली बार चुनाव होने जा रहा है। यहां दोनों ही राजनीतिक दल रणनीति बनाने में जुटे हैं। कांग्रेस इस मामले में काफी आगे निकल चुकी है। यह गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू का निर्वाचन क्षेत्र है और पिछले दिनों सरकार ने विकास कार्यों के लिए पिटारा खोल दिया था। इसके बाद खुद गृहमंत्री दुपहिया पर घूमकर चुनावी माहौल बनाते दिखे थे। रिसाली नगर निगम गठन के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करने रैली भी निकाली गई थी।
छवि की अहमियत ज्यादा
भले ही राजनीतिक दल नगरीय निकाय चुनाव को लेकर बेहद गम्भीरता दिखा रहे हों, किन्तु वास्तविकता यह भी है कि वार्डों में प्रत्याशियों की निजी छवि से ही जीत-हार तय होगी। लोकतंत्र का यह सबसे निचले स्तर का चुनाव है, इसलिए व्यक्तिगत छवि काफी मायने रखती है। इसके लिए क्षेत्र में सक्रियता, पार्टी की रीति-नीति और उसके कामकाज को आम लोगों तक पहुंचाना और लोगों के दुख-दर्द में शरीक होना ही मुख्य पैमाना होता है। जाहिर है कि राजनीतिक दलों के लिए सक्रिय, जुझारू और साख रखने वाले प्रत्याशियों को तलाशना भी एक चुनौती होगी।
भिलाई में सबसे ज्यादा 70 वार्ड
जिले के चारों निकायों में से सबसे ज्यादा 70 वार्ड भिलाई नगर निगम क्षेत्र में है। यहां के वर्तमान विधायक देवेन्द्र यादव इससे पहले महापौर थे। उन्हें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बेहद करीबी माना जाता है। ऐसे में भिलाई निगम चुनाव का पूरा-पूरा दारोमदार देवेन्द्र यादव के ही कंधों पर है। वहीं वैशाली नगर क्षेत्र में कुल 40 वार्ड हैं। इतने ही वार्ड चरोदा नगर निगम क्षेत्र में भी हैं। जामुल पालिका में कुल 20 वार्ड आते हैं। इस तरह जिले के कुल 170 वार्डों में 20 दिसम्बर को मतदान होने जा रहा है। 23 दिसम्बर के नतीजों से जिले की राजनीतिक दशा-दिशा काफी हद तक स्पष्ट होगी।
सत्तापक्ष की प्रतिष्ठा दांव पर
भिलाई-चरोदा नगर निगम जहां मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का निर्वाचन क्षेत्र है, वहीं रिसाली नगर निगम गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के निर्वाचन क्षेत्रांतर्गत आता है। जबकि जामुल पालिका अहिवारा क्षेत्र के अधीन है, जहां के विधायक रूद्रकुमार गुरू प्रदेश सरकार में कद्दावर मंत्री हैं। यही वजह है कि दुर्ग जिले पर पूरे प्रदेश की निगाहें लगी हुई है। चुनाव के नतीजे इन नेताओं की प्रतिष्ठा से जुड़े हैं। दूसरी ओर भाजपा के दोनों सांसदों की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। खासकर सांसद विजय बघेल का राजनीतक भविष्य इन्हीं नतीजों के अंतर्निहित है। भाजपा के आंतरिक सूत्र दावा कर रहे हैं कि पार्टी इस बार राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय को जिले की किसी सीट से विधानसभा चुनाव लड़वा सकती है। ऐसे में उनकी साख भी दांव पर है।




