रायपुर। आजादी का अमृत महोत्सव के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग देशभर के 125 विश्वविद्यालय के साथ मिलकर स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान पर कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस श्रृंखला के तहत 23 सितंबर से छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय कार्यक्रम की शुरुआत हुई। यूनिवर्सिटी के स्वामी आत्मानंद सभागार में हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य अनंत नायक ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जनजातीय योद्धाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज से आने वाले हमारे नायकों के बारे में इतिहास में न्याय नहीं किया गया है। सिद्धू कान्हू, बुद्धु भगत, शंकर शाह, तिलका मांझी जैसे वीरों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, लेकिन इतिहास में जिस तरह से उसका वर्णन किया जाना चाहिए था वैसा नहीं किया गया।
अंग्रेजों ने साजिश के तहत जनजाति समाज की गौरवशाली परंपरा को झुठलाकर उन्हें आपराधिक जनजाति घोषित कर दिया। दरअसल ऐसा इसलिए था, क्योंकि जनजाति समाज ने कभी उनकी गुलामी को स्वीकार ही नहीं किया गया। विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर ऐसे कार्यक्रमों को करने का उद्देश्य भी यही है कि ताकि समाज को स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान का पता चल सके। साथ ही विश्वविद्यालयों में जनजातीय विषयों से जुड़े विषयों पर अनुसंधान को बढ़ावा मिले और जनजाति समाज से आने वाले छात्र भी ज्यादा से ज्यादा अनुसंधान में शामिल हों।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आयोग ने स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान पर कार्यक्रमों की जो श्रृंखला शुरू की है, उसकी शुरुआत हमारे विश्वविद्यालय से हो रही है यह हमारे लिए गौरव की बात है। छत्तीसगढ़ में हमारे विश्वविद्यालय से इस तरह के कार्यक्रम की शुरुआत होने से देशभर में एक सकारात्मक संदेश जाएगा।




