रायपुर। हरियाली के प्रतीक के रूप में मनाए जाने वाले हरेली अमावस्या पर्व को अभी तीन दिन शेष हैं, लेकिन इससे पहले ही सावन में शिवालयों में हरियाली छाई रही। सुबह से जलाभिषेक का सिलसिला चलता रहा। शाम को विविध मंदिरों में शिवलिंग का अलग-अलग रूप में श्रृंगार किया गया। शिवलिंग का श्रृंगार करके प्रकृति को बचाने का संदेश दिया गया। अनेक शिवालयों में केला वृक्ष, आमपत्ता, बेलपत्र, नीमपत्र, फूलों से श्रृंगार करके हरियाली को प्रदर्शित किया गया।
बूढ़ातालाब स्थित बूढ़ेश्वर मंदिर के प्रभारी ट्रस्टी राजेश व्यास ने बताया कि शिवलिंग का श्रृंगार शिवजी की जटा पर गंगा का अवतरण के रूप में किया गया। श्रद्धालुओं को प्रकृति के विविध रूप नदी, पहाड़, जंगल को बचाने का संदेश दिया गया। श्रृंगार में भगवान बूढ़ेश्वर नाथ का शिवलिंग तीन फीट का बनाकर रुद्राक्ष की माला से श्रृंगार किया गया।
बोल बम के जयकारे गूंज उठे
दूसरे सावन सोमवार को श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा भीड़ महादेवघाट स्थित हटकेश्वर महादेव मंदिर में दिखाई दी। यहां सुबह शिवलिंग का रुद्राभिषेक एवं सहस्त्राभिषेक करने श्रद्धालु पहुंचे। पंडितों ने विधिवत रुद्राभिषेक करवाया। विविध इलाकों से कांवरियों का दल बोल बम के जयकारे लगाते श्रद्धा भाव से निकला। भाठागांव चौक और अश्विनी नगर, अग्रसेन चौक पर कांवरियों का स्वागत कर जलपान, फलाहार कराया गया।
इंद्रदेव ने किया जलाभिषेक
विविध इलाकों के शिव मंदिरों में सुबह से जलाभिषेक करने के लिए महिलाओं, बुजुर्गों, युवतियों की कतार लगी रही। बूढ़ेश्वर मंदिर में शिवलिंग के ऊपर तांबे के बड़े पात्र में जल अर्पित किया गया। इसमें हजार छिद्रों से जल शिवलिंग पर अर्पित होता रहा। बारिश करने वाले देवता इंद्रदेव ने भी कहीं रिमझिम फुहारों और कहीं तेज बारिश करके खुले में विराजित शिवलिंग का जलाभिषेक किया। श्याम टाकीज के समीप गणेश, शिव, सांईं मंदिर में दिनभर जलाभिषेक के पश्चात शाम को नील महादेव के रूप में श्रृंगार किया गया। इसी तरह टिकरापारा के नरहरेश्वर और कोतवाली चौक के नंदेश्वर, केलकरबाड़ी, नर्मदापारा के नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में भी प्रकृति के रूप में पेड़-पौधों से श्रृंगार किया गया। शाम से लेकर रात तक श्रृंगार दर्शन करने श्रद्धालु पहुंचते रहे। शयन आरती के पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया।




