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हरेली विशेष: हरी चुनरिया ओढ़ धरती ने कर लिया श्रृंगार, आओ मनाएं खुशियां कि आया हरियाली त्यौहार

By @dmin
Published: July 28, 2022
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हरेली विशेष: हरी चुनरिया ओढ़ धरती ने कर लिया श्रृंगार, आओ मनाएं खुशियां कि आया हरियाली त्यौहार
हरेली विशेष: हरी चुनरिया ओढ़ धरती ने कर लिया श्रृंगार, आओ मनाएं खुशियां कि आया हरियाली त्यौहार
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विभाश्री साहू, न्यूयॉर्क, अमेरिका
हरेली तिहार (हरियाली त्यौहार) छत्तीसगढ़ का सबसे प्रमुख त्यौहार है। सावन मास के, कृष्ण पक्ष के अमावस्या तिथि को यह त्यौहार मनाया जाता है। भीषण गर्मी के पश्चात, मानसून के आगमन से ही लोगों के मन में उत्साह बढऩे लगता है। सावन के महीने में खेतों में और चहु ओर हरियाली छा जाती है, तब लोगों का उमंग और भी बढ़ जाता है। इसी उमंग और उत्साह को छत्तीसगढ़ में सावन के स्वागत में, रिमझिम पहली-पहली फुहार को “हरेली तिहार” (हरियाली उत्सव) के रूप में मनाया जाता है।

हरेली तिहार को छत्तीसगढ़ के सभी ग्राम, नगर व कस्बों में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। वैसे तो छत्तीसगढ़ अपने खनिज संपदा, विद्युत उत्पादन के लिए जाना जाता है लेकिन इनके साथ ही छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है। यहां विशेष रूप से धान की खेती की जाती है इसलिए छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” भी कहा जाता है।

हरेली तिहार विशेष रूप से खेतों की हरियाली के लिए होता है। इसलिए इस दिन विशेष रूप से कृषि संबंधित उपकरणों हल, कुदाल, फावड़ा आदि की पूजा की जाती है। कृषि उपकरणों के साथ-साथ मवेशियों गाय, बैल की भी पूजा की जाती है। इस दिन मवेशियों के लिए विशेष पकवान बनाए जाते हैं।

घर के सदस्यों के लिए भी कई तरह के पारंपरिक पकवान बनाए जाते है। घरों में गुड़ का चिला बनाता है। गुड़ का चिला बड़ा ही स्वादिष्ट होता है। यह चावल आटे और गुड़ से बनाया जाता है। छत्तीसगढ़ का गुड़ का चिला, राजस्थान का मालपुआ या अमेरिका का पैन केक, इन सबका स्वाद बिल्कुल एक जैसा ही होता है।

इस दिन लोग ग्राम देवी देवताओं की भी पूजा करते हैं। प्रत्येक घरों में प्रमुख द्वार पर नीम की डाल लगाई जाती है, इस विश्वाश के साथ कि यह डाल पूरे वर्ष भर इस घर में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की बीमारियों से रक्षा करेगा। हरेली में जहां बड़े बुजुर्ग पूजन कर हरियाली का स्वागत कर उत्साहित होते हैं, वहीं बच्चे भी कई तरह के खेल से इस उत्सव में शामिल होते हैं। इस दिन विशेष रूप से बांस से गेड़ी का निर्माण किया जाता है, जिसमें चढ़कर बच्चे चलते हैं। बड़ा ही रोचक होता है कि उसी दिन ये गेड़ी बनाया जाता है, और बच्चे उसी दिन इसका उपयोग करना सीख जाते हैं, बिना किसी विशेष प्रशिक्षण के। गेड़ी में संतुलन बनाना “होवर बोर्ड” (स्वयं संतुलन इलेक्ट्रॉनिक स्कूटर) जैसा ही होता है। इस दिन बच्चों तथा युवाओं के लिए कई तरह के खेल प्रतिस्पर्धाओं का भी आयोजन किया जाता है, जैसे गेड़ी दौड़ नारियल फेक प्रतियोगिता, इत्यादि।

प्रकृति के अभिनंदन का यह त्यौहार समस्त लोगों के जीवन में खुशहाली लेकर आए ये कामना की जाती है। इसी कामना के साथ हरेली तिहार (हरियाली त्यौहार) की समस्त प्रदेश वासियों को शुभकामनाएं।

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