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स्कूलों में इस साल से योग और नैतिक शिक्षा की पढ़ाई अनिवार्य…

By @dmin
Published: June 6, 2022
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रायपुर। स्कूली बच्चों को स्वास्थ्य और सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए इसी सत्र से योग और नैतिक शिक्षा की पढ़ाई अनिवार्य होगी। जीवन के मूल्यों को समझाने और योग के प्रति बच्चों को प्रेरित करने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने एक अलग विषय बनाया है। इसमें स्वच्छता और स्व-अनुशासन को लेकर बच्चों को सचेत करने का प्रयास किया गया है। इसके जरिए बच्चे पहली बार कोविड-19 के बारे में एक पाठ अलग से पढ़ेंगे।

कोरोनाकाल में बच्चों में अनुशासन की कमी से जुड़ा फीडबैक मिलने के बाद उन्हें अनुशासित करने के लिए योग की किताब में ही नैतिक शिक्षा को भी स्थान दिया गया है। इसमें बच्चों को अपने माता-पिता, शिक्षकों और बड़ों का आदर करने की सीख दी गई है। इसके अलावा यातायात के नियमों का पालन, राष्ट्रगान, राष्ट्र के प्रति प्रेम जागृत करने, समाज में सभी के प्रति सम्मान और आदर के भाव को रखने की भी सीख दी गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा के बाद एससीईआरटी ने इस विषय पर काम किया है। स्कूलों में योग के लिए कोई अलग से शिक्षक नियुक्त नहीं किया जाएगा। एससीईआरटी के संचालक राजेश सिंह राणा ने बताया कि इस साल हमने बड़ी संख्या में शिक्षकों को योग का प्रशिक्षण दिया है। यही मास्टर ट्रेनर विकासखंड स्तर पर अन्य शिक्षकों को भी योग की बारीकियों से अवगत कराएंगे।

अधिकारियों के मुताबिक कक्षा तीसरी से पांचवीं, छठवीं से आठवीं और नौवीं से 12वीं तक तीन स्तरों पर किताबें तैयार की गई हैं। प्रदेश के करीब 50 लाख बच्चों को इसका फायदा मिलेगा। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने कहा, अन्य किताबों के साथ-साथ योग और नैतिक शिक्षा के लिए किताब तैयार की गई है।

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