-कोमल धनेसर
छत्तीसगढ़ के नए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी जम्बों कार्यकारिणी रविवार रात घोषित कर दी। सूची घोषित होने के दुर्ग जिले के कद्दावर नेताओं का नाम गायब होना लोगों को हजम नहीं हो रहा। चलो कांग्रेसियों को भी चुटकी लेने का मौका मिल गया है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में दुर्ग का अलग स्थान है। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस यहां के कद्दावर और सीनियर लीडर प्रद्रेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में दखल रखते हैं,लेकिन इस बार भाजपा ने जिस तरह दुर्ग जिले को अनदेखा किया उसके कई मायने निकाले जा सकते हैं। छत्तीसगढ़ की राजनीति की पाठशाला दुर्ग में एक ओर जहां मुख्यमंत्री से लेकर तीन-तीन मंत्री एक जिले से हैं, वही भाजपा की इस सूची ने उलटफेर ही कर दिया। भाजपा ने पहले प्रदेशअध्यक्ष और फिर प्रदेश प्रभारी बदल कर बदलाव के संकेत तो दे दिए थे, लेकिन यह बदलाव दुर्ग जिले के लिए इतना भारी पड़ेगा किसी ने सोचा भी नहीं था। प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव की कार्यकारिणी में एक भी पदाधिकारी दुर्ग जिले से नहीं लिया गया है जिसके कारण बीजेपी कार्यकर्ता मायूस हो गए तो कांग्रेसी भी चुटकी लेने से पीछे नहीं हट रहे हैं कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि बीजेपी को अब दुर्ग जिले में एक भी नेता उस लायक नहीं मिला जिसे प्रदेश में स्थान दिया जा सके । भाजपा में दुर्ग के नेताओं का दबदबा शुरू से रहा है। बीजेपी की कद्दावर और राष्ट्रीय नेता डॉ सरोज पांडे राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण पदों पर रही है। तो बीजेपी के दूसरे बड़े दिग्गज नेता में प्रेम प्रकाश पांडे का नाम आता है। प्रेम प्रकाश पांडे अविभाजित मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़ में भी मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के पद पर रहे हैं उनकी गिनती बीजेपी के सीनियर लीडरों में की जाती है लेकिन उनके भी समर्थकों को तवज्जो नहीं दी गई दुर्ग लोकसभा से सांसद विजय बघेल का भी अपना स्थान है पूरे छत्तीसगढ़ में चार लाख से ज्यादा वोटों से जीतने का रिकॉर्ड विजय बघेल के नाम पर भी है। उनकी भी अपनी एक बड़ी फैन फॉलोइंग है वे भी दुर्ग जिले में कद्दावर नेता के रूप में गिने जाते हैं बड़े नेता होने के बावजूद भी दुर्ग से किसी भी नेता के समर्थकों को या कार्यकर्ता सहित किसी भी नेता को प्रदेश बॉडी में जगह ना मिलना कहीं ना कहीं आने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट को लेकर एक बड़े बदलाव का इशारा तो नहीं..
सीधी बात: बदलाव का इशारा तो नहीं…




