रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने मंगलवार को मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता, मंत्रियों और विधायकों के वेतन में वृद्धि को प्रभावित करने वाले विधायकों का एक सेट पारित किया। विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संसदीय सचिवों के वेतन और भत्ते बढ़ाने का प्रस्ताव करने वाले विधायकों का एक और सेट भी सदन में पारित किया गया।
विधायकों के वेतन वृद्धि से संबंधित चार अलग-अलग विधेयक विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किए गए। एक विधेयक के अनुसार, वृद्धि के बाद मुख्यमंत्री का वेतन मौजूदा 1.35 लाख रुपये से बढ़कर 2.05 लाख रुपये प्रतिमाह हो जाएगा, जबकि मंत्रियों का वेतन 1.30 लाख रुपये से बढ़कर 1.90 लाख रुपये हो जाएगा।
संसदीय सचिव का प्रतिमाह 1.75 लाख रुपये वेतन होगा
छत्तीसगढ़ कैबिनेट में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत तेरह मंत्री हैं। संसदीय सचिवों को प्रतिमाह 1.75 लाख रुपये मिलेंगे जो पहले 1.21 लाख रुपये था। बघेल सरकार में 15 संसदीय सचिव हैं। एक अन्य विधेयक में कहा गया है कि अध्यक्ष का वेतन 1.32 लाख रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 1.95 लाख रुपये किया जाएगा जबकि उपाध्यक्ष को 1.28 लाख रुपये प्रतिमाह की जगह 1.80 लाख रुपये मिलेंगे। इसी तरह विपक्ष के जिन नेताओं के पास कैबिनेट रैंक है, उनको 1.90 लाख रुपये प्रतिमाह मिलेगा, जो कि वर्तमान में 1.30 लाख रुपये प्रतिमाह है।
विधायक को प्रतिमाह मिलेगा 1.60 लाख रुपये का वेतन
एक विधायक को मौजूदा 1.10 लाख रुपये की जगह अब 1.60 लाख रुपये प्रतिमाह का वेतन मिलेगा। वेतन वृद्धि के बाद एक विधायक को 20,000 रुपये मूल वेतन, 55,000 रुपये निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, 10,000 रुपये टेलीफोन भत्ता और 15,000 रुपये चिकित्सा भत्ता प्रतिमाह मिलेगा। इसके अलावा विधायकों को 2,000 रुपये दैनिक भत्ता मिलेगा।
विधायकों को दिए जाने वाले 15,000 रुपये प्रतिमाह के अर्दली भत्ते में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, वेतन और भत्तों में वृद्धि से राज्य के खजाने पर लगभग 6.81 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बोझ पडऩे की संभावना है।




