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सियासत का रूख तय करेंगे नतीजे, 4 जून के बाद नई करवट ले सकती है छत्तीसगढ़ की राजनीति

By Om Prakash Verma
Published: May 29, 2024
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सियासत का रूख तय करेंगे नतीजे, 4 जून के बाद नई करवट ले सकती है छत्तीसगढ़ की राजनीति
सियासत का रूख तय करेंगे नतीजे, 4 जून के बाद नई करवट ले सकती है छत्तीसगढ़ की राजनीति
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रायपुर (श्रीकंचनपथ न्यूज़)। लोकसभा चुनाव के नतीजे छत्तीसगढ़ की सियासत का रूख तय करने जा रहे हैं। आज से 5 दिन बाद अर्थात् 4 जून को पूरे देश की ही तरह छत्तीसगढ़ की 11 सीटों पर भी मतगणना होनी है। भाजपा जहां सभी 11 सीटें जीतने का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस भी करीब 5 सीटों पर स्पष्ट जीत की उम्मीद सजोए हुए है। नतीजों को लेकर भले ही अटकलों का दौर जारी हो, लेकिन राजनीति के जानकारों का मत है कि इस बार छत्तीसगढ़ में कड़ा मुकाबला हुआ है। विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भाजपा ने राज्य को विष्णुदेव साय के रूप में आदिवासी मुख्यमंत्री की सौगात दी थी, जिन्होंने चंद महीनों में ही अपनी सरकार के कामकाज से लोगों को प्रभावित किया। ऐसे में चुनाव के नतीजे राज्य सरकार के कामकाज की कसौटी पर होंगे।

छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से कई हाई प्रोफाइल और हॉट सीटें हैं। इन सीटों पर इस बार कड़ा मुकाबला हुआ है, इसलिए हर किसी की दिलचस्पी यह जानने में है कि आखिर इन क्षेत्रों के मतदाताओं ने किस पर भरोसा जताया है। भाजपा व कांग्रेस ने इन सीटों पर अपने कद्दावर नेताओं को उतारकर चुनावी मुकाबले को रोमांचक बना दिया है। भाजपा की चर्चा करें तो रायपुर लोकसभा सीट से पार्टी ने अपने कद्दावर नेता और 8 बार के विधायक बृजमोहन अग्रवाल पर दांव लगाया। वहीं कोरबा सीट से राष्ट्रीय नेत्री सरोज पाण्डेय को उतारा गया। बृजमोहन के मुकाबले कांग्रेस ने पूर्व विधायक विकास उपाध्याय को उतारा, जिन्हें कमजोर प्रत्याशी माना गया। वहीं, सरोज पाण्डेय का मुकाबला निवृत्तमान सांसद ज्योत्सना महंत से है। सर्वाधिक महत्वपूर्ण और दिलचस्प मुकाबला राजनांदगांव में है, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खूब रंग जमाया। भाजपा ने यहां से निवृत्तमान सांसद संतोष पाण्डेय को रिपीट किया। इस सीट पर काफी कड़ा मुकाबला हुआ है, इसलिए सबकी निगाहें राजनांदगांव पर लगी हुई है।

कसौटी पर आदिवासी सीटें
बस्तर लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां से भाजपा के महेश कश्यप को कांग्रेस के कद्दावर नेता व पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने जोरदार टक्कर दी है। बस्तर के अलावा कांकेर सीट से भी कांग्रेस को खासी उम्मीदें हैं। यह दोनों सीटें अजजा आरक्षित है। कांकेर से कांग्रेस के बिरेश ठाकुर का मुकाबला भाजपा के भोजराज नाग से है। अजजा आरक्षित एक अन्य सीट सरगुजा को लेकर भी कांग्रेस आशान्वित है। यहां से भाजपा ने चिंतामणि महाराज तो कांग्रेस ने राज परिवार की शशि सिंह को मैदान में उतारा था। यदि इन तीनों आदिवासी सीटों पर उलटफेर होता है तो यह भाजपा के लिए ज्यादा चिंतनीय होगा, क्योंकि प्रदेश के मुखिया स्वयं आदिवासी हैं। चुनाव प्रचार के दौरान सीएम विष्णुदेव साय ने खुलकर कहा था कि यदि आदिवाासियों का साथ भाजपा को नहीं मिला तो फिर आदिवासी मुख्यमंत्री क्यों बनाया जाएगा। सीएम साय का इशारा बिलकुल स्पष्ट था।

सामान्य सीटों पर भी निगाहें
राज्य की 11 में से 6 सीटें सामान्य हैं। इनमें रायपुर, दुर्ग, कोरबा, बिलासपुर, राजनांदगांव व महासमुंद शामिल है। इनमें से राजनांदगांव को छोड़कर बाकी की 5 सीटों पर भाजपा की जीत संभावना जताई जा रही है। रायपुर में बृजमोहन अग्रवाल तो दुर्ग में निवृत्तमान सांसद विजय बघेल ने चुनाव लड़ा। कोरबा से सरोज पाण्डेय व बिलासपुर से तोखन साहू प्रत्याशी रहे। जबकि महासमुंद से रूपकुमारी चौधरी भाजपा से प्रत्याशी हैं। मतदान पश्चात जो आंकलन निकलकर सामने आया है, वह बताता है कि सामान्य सीटों पर भाजपा अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। राजनांदगांव से पार्टी ने निवृत्तमान सांसद संतोष पाण्डेय को रिपीट किया है। माना जा रहा है कि यहां ग्रामीण मतदाताओं ने इस बार भाजपा का साथ नहीं दिया। हालांकि नतीजे आने के बाद ही स्थितियां स्पष्ट होंगी। वैसे राजनांदगांव सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। यहां से डॉ. रमन, उनके बेटे अभिषेक सिंह, मधुसूदन यादव और संतोष पाण्डेय लगातार जीते।

अजा सीट पर कड़ा मुकाबला
छत्तीसगढ़ की इकलौती अनुसूचित जाति आरक्षित सीट जांजगीर चाम्पा में कांग्रेस ने कद्दावर नेता व पूर्व नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया को मैदान में उतारकर कड़ी चुनौती पेश की। यहां से भाजपा की कमलेश जांगड़े प्रत्याशी हैं। माना जा रहा है कि इस सीट पर भी कड़ा मुकाबला हुआ है। डॉ. डहरिया पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे। लेकिन अपने कद्दावर नेताओं को टिकट देने की नीति के चलते उन्हें चांचगीर चाम्पा से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया गया। भाजपा को इस सीट पर जीत की उम्मीद है। वहीं स्वयं कांग्रेस प्रत्याशी शिवकुमार डहरिया अपनी जीत का दावा कर चुके हैं। इसी तरह अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रायगढ़ सीट लम्बे समय से भाजपा का गढ़ रही है। इस बार भी यहां किसी उलटफेर की संभावना नहीं है। भाजपा ने यहां राधेश्याम राठिया तो कांग्रेस से डॉ. मेनकादेवी सिंह ने बतौर प्रत्याशी जमकर माहौल बनाया था।

4 सीटों पर खेला कांग्रेस ने दाँव
राज्य की 4 सीटों पर कांग्रेस ने बड़ा दांव चला है। ये सीटें हैं राजनांदगांव, बिलासपुर, महासमुंद और बस्तर। बस्तर को छोड़ दें तो बाकी की तीनों सीटों पर जातीय और सामाजिक समीकरणों के हिसाब से प्रत्याशी तय किए गए। तीनों सीटों के प्रत्याशी दुर्ग जिले से हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पिछड़ा वर्ग बाहुल्य राजनांदगांव से उतारा गया। बघेल पिछड़ा वर्ग के कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे हैं। वहीं बिलासपुर से देवेन्द्र यादव को प्रत्याशी बनाया गया, जो भिलाई नगर क्षेत्र के विधायक हैं। बिलासपुर में यादव समाज के वोटों की बाहुल्यता के चलते ही देवेन्द्र को बिलासपुर भेजा गया। इसी तरह साहू समाज की बाहुल्यता वाले महासमुंद क्षेत्र से पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को उम्मीदवारी तय की गई। कवासी लखमा को भी उनके कद को देखते हुए बस्तर से प्रत्याशी बनाया गया। कांग्रेस का यह दांव कितना सफल होता है, यह तो नतीजे ही बताएंगे, लेकिन इन चारों सीटों पर बराबरी के मुकाबले की संभावना जताई जा रही है।

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