ShreeKanchanpathShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: रायपुर का प्राचीन शिवालय; सैकंड़ों वर्ष पुराना है ये शिव मंदिर, जानें क्यों कहलाये बूढ़ेश्वर महादेव
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Font ResizerAa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
Breaking NewsChhattisgarhFeaturedRaipur

रायपुर का प्राचीन शिवालय; सैकंड़ों वर्ष पुराना है ये शिव मंदिर, जानें क्यों कहलाये बूढ़ेश्वर महादेव

By Om Prakash Verma
Published: August 4, 2025
Share
रायपुर का प्राचीन शिवालय; सैकंड़ों वर्ष पुराना है ये शिव मंदिर, जानें क्यों कहलाये बूढ़ेश्वर महादेव
रायपुर का प्राचीन शिवालय; सैकंड़ों वर्ष पुराना है ये शिव मंदिर, जानें क्यों कहलाये बूढ़ेश्वर महादेव
SHARE

रायपुर। सावन का आज चौथा सोमवार है। ऐसे में शिव मंदिरों में सोमवार सुबह से भक्तों की भीड़ लगी हुई है। रायपुर के शिलालयों में दर्शन करने के लिए शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। मंदिरों में सुबह से भक्तों का तांता लगा हुआ है। रायपुर के प्राचीन बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर में लोग भगवान भोले को जलाभिषेक किए।

बात रायपुर के बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की करें, तो यहां पांच सौ वर्ष पूर्व बूढ़ातालाब के किनारे शिवलिंग की पूजा की जाती थी। मान्यता है कि शिवलिंग पर हमेशा सर्प लिपटे रहते थे। श्रद्धालु तालाब में स्नान करने के बाद शिवलिंग पर जलाभिषेक करते थे। करीब 75 वर्ष पहले पुष्टिकर ब्राह्मण समाज ने यहां पर भव्य मंदिर बनवाकर शिवलिंग को प्राण प्रतिष्ठित की। रायपुर का बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, आदिवासी समाज के कुल देवता बूढ़ादेव के नाम पर बूढ़ातालाब का निर्माण हुआ था। इसी तालाब के किनारे स्थित शिवलिंग को बूढ़ेश्वर शिवलिंग कहा जाने लगा। बाद में मंदिर का निर्माण कराया गया।

मंदिर की विशेषता
मंदिर परिसर में प्राचीन कुआं है। इस कुएं के जल से ही शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। कुएं के सामने भोलेनाथ के अवतार भैरव बाबा की प्रतिमा खुले आसमान में विराजित है। इस प्रतिमा का सोने, चांदी के बर्क से अगहन माह की अष्टमी तिथि पर विशेष श्रृंगार किया जाता है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान गणेश, कार्तिकेय, पार्वती, नंदीदेव भी प्रतिष्ठापित हैं। एक बड़े हाल के बीच छोटा सा गर्भगृह बना है और चारों ओर अनेक देवी-देवता विराजित हैं। राधा-कृष्ण, श्रीराम-सीता के मंदिर है।

हर सोमवार को श्रृंगार
पुजारी पंडित महेश पांडेय ने बताया कि मंदिर में सावन के हर सोमवार को किया जाने वाला श्रृंगार प्रसिद्ध है। यहां पर विविध सामग्री से शिवलिंग का श्रृंगार किया जाता है। अलग-अलग रूपों में भोलेनाथ को सजाया जाता है। जलाभिषेक की व्यवस्था की जाती है। पुराने वटवृक्ष से लोगों की आस्था जुड़ी है। मंदिर में दर्शन करने की विशेष महत्व है।

फेमस है भस्म आरती
यहां महाशिवरात्रि और सावन महीने में दर्शन करने के लिए रायपुर सहित आसपास के जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि भव्य तरीके से मनाई जाती है। महाशिवरात्रि पर सुबह शिवलिंग पर भस्म आरती की जाती है। बनारस, उज्जैन और रामेश्वर ज्योतर्लिंग से भस्म मंगवाकर उसी भस्म का लेपन किया जाता है। सुबह से दोपहर तक जलाभिषेक होता है। शाम को भांग, धतूरा, चांदी, मालीपाणा के बर्क से श्रृंगार किया जाता है।

200 साल पुराना वटवृक्ष
बूढ़ेश्वर मंदिर के 200 साल पुराना वटवृक्ष है। श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र इस वृक्ष के नीचे वट सावित्री व्रत पूजा करने सैकड़ों महिलाएं पहुंचती हैं। इसी वृक्ष के नीचे ही नृसिंह जयंती पर नृसिंह लीला का भव्य मंचन किया जाता है, जो पूरे प्रदेशभर में मशहूर है। मंदिर परिसर में भगवान शिव के अवतार भैरव बाबा की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर के ऊपर गुंबद नहीं बनाया गया है। भैरव अष्टमी पर मंदिर में लोग दर्शन करने पहुंचते हैं।

लॉक डाउन ब्रेकिंग: चेम्बर प्रतिनिधि मिले कलेक्टर से…. इस मांग पर बनी सहमति… व्यापारियों को मिलेगी राहत
राजस्व प्रभारी सीजू एंथोनी ने ली विभाग की बैठक, शासन की महत्वकांक्षी योजना पर अमल करने पर जोर
कोरोना पर मुख्यमंत्रियों संग बैठक में बोले पीएम मोदी- मृत्युदर में आई कमी, रिकवरी में बढ़ोतरी, उठाए गए कदम सही दिशा में
वाहन लोन लेने वालों की अपेक्षाओं में शीर्ष पाँच बदलाव
सरकारी अस्पताल में सप्लाई होने वाली दवाइयों को जंगल में फेंका, गरीबों की दवाइयों का ऐसा हाल देख अधिकारियों के उड़े होश
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी Gustakhi Maaf: इस पागलपन का अंत कहां..
Next Article shreekanchanpath 292 # 04 August 2025

Ro.No.-13784/19

× Popup Image

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?