रायपुर। देश के कई राज्यों में राज्य सरकार और राजभवन के बीच खींचतान की खबरें मीडिया में सुर्खियां बनी है। इस लिस्ट में छत्तीसगढ़ का नाम भी जुड़ गया है। राज्यपाल अनुसुईया उइके और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच तल्ख बयानों के जरिए एक-दूसरे पर वार और पलटवार का दौर शुरू हो गया है। बालोद के जिस मंच पर राज्यपाल अनुसुइया उइके ने राज्य सरकार के प्रति नगरीय निकाय गठन को लेकर तीखापन दिखाया था तो उसी मंच पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्यपाल के बयान के प्रति तल्खी दिखाई है। इससे पहले झीरम मामले की रिपोर्ट को लेकर राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति निर्मित हुई थी। वहीं राज्यपाल पर राज्य सरकार ने दो संशोधन विधेयकों को रोकने का भी आरोप लगाया था।
बता दें कि बालोद जिले के राजाराव पठार वीर मेला कार्यक्रम के मंच से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्यपाल अनुसुईया उइके के बयान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल छत्तीसगढिय़ों की नियुक्ति को प्राथमिकता क्यों नहीं देतीं? क्या छत्तीसगढ़ में प्रतिभा की कमी है? सीएम ने कहा कि नई नगर पंचायतें और नगर पालिका नहीं बना रहे हैं, लेकिन जो बना हुआ है, उसे क्यों उजाड़ रहे हैं? इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें वाइस चांसलर नियुक्त करने का अधिकार है तो वे छत्तीसगढिय़ों की नियुक्ति क्यों नहीं करती हैं। क्या छत्तीसगढ़ में प्रतिभा की कमी है। ताजा घटनाक्रम के बाद छत्तीसगढ़ में राजभवन व सरकार के बीच कई मुद्दों को लेकर खींचतान की चर्चा फिर शुरू हो गई है।
राज्यपाल ने कहा था अगर मैं चाहूं तो नगर पंचायत और नगरपालिका को निरस्त कर सकती हूं
आपको बता दें कि एक दिन पहले इसी मंच पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंची राज्यपाल अनुसुइया उइके ने आदिवासियों की सुरक्षा के मुद्दे पर तल्खी जाहिर की थी। राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए राज्यपाल अनुसुइया उइके ने कहा था कि आदिवासी क्षेत्रों में जबरदस्ती नगर पंचायत और नगरपालिका क्यों बना रहे हैं? इसकी शिकायत लगातार मेरे पास आ रही है। अगर क्षेत्र के आदिवासियों का सर्वसम्मति प्रस्ताव है, तब बनाएं। अगर मैं चाहूँ तो सभी नगर पंचायत और पालिका को निरस्त कर सकती हूं। ये अधिकार गवर्नर को है, लेकिन मैं ऐसा नहीं चाहती कि वाद-विवाद की स्थिति उत्पन्न हो।




