फिरोजाबाद (एजेंसी)। मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोडऩे के बाद इस्तीफों का सिलसिला जारी है। गुरुवार को शिकोहाबाद से भाजपा के विधायक डॉ. मुकेश वर्मा से पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की चर्चाएं सोशल मीडिया पर चलने लगीं। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को भेजा है। डॉ. मुकेश वर्मा पांच वर्ष पूर्व ही भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले वे बहुजन समाज पार्टी में थे। 2012 का विधानसभा चुनाव उन्होंने बसपा से लड़ा था और दूसरे नंबर पर रहे थे।

Uttar Pradesh: Mukesh Verma, BJP MLA from Shikohabad (Firozabad), resigns from primary membership of the party
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) January 13, 2022
"Swami Prasad Maurya is our leader. We will support whatever decision he takes. Many other leaders will join us in the coming days," he says. pic.twitter.com/UAfBBAxftW
सोशल मीडिया पर दी जानकारी
वहीं गुरुवार सुबह उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि भाजपा सरकार द्वारा पांच वर्ष के कार्यकाल में दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं व जनप्रतिनिधियों को कोई तवज्जो नहीं दी गई और न ही कोई उचित सम्मान दिया गया। इसके अलावा दलित, पिछड़ों किसानों व बेरोजगारों की उपेक्षा की गई। ऐसे कूटनीतिक रवैये के कारण मैं भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य शोषित, पीडि़तों की आवाज हैं और वह हमारे नेता हैं मैं उनके साथ हूं।
मोदी लहर में मुकेश बने थे पहली बार विधायक
वर्ष 2017 में बसपा छोड़कर भाजपा में आए डॉ. मुकेश वर्मा को मोदी लहर में विधायक बनने का सौभाग्य मिला। शिकोहाबाद विधानसभा में 87,851 वोट पाकर सपा प्रत्याशी संजय यादव को 10,777 मतों से हराया था। संजय यादव को 77, 074 वोट मिले थे। जबकि तीसरे नंबर पर बसपा के शैलेंद्र कुमार को 37, 512 वोट हासिल हुए थे।
अब सपा में जाने की लग रही अटकलें
डॉ. मुकेश वर्मा सपा में जाने की अटकलें अब तेज हो गई हैं। क्योंकि इस्तीफे में स्वामी प्रसाद मौर्य का जिक्र कर उन्हें अपना नेता बताया है। इससे यह कयास लगाया जा रहा है कि वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं।
पार्टी चल रही थी डॉ. मुकेश से नाखुश
भाजपा सूत्रों की मानें तो डॉ. मुकेश वर्मा के कामकाज से कार्यकर्ता के साथ-साथ आलाकमान नेता भी खुश नहीं थे। टिकट कटने की सूची में भी इनका नाम शामिल था ऐसा लोग बता रहे थे। वहीं कुछ दिनों पहले जैन समाज के लोगों ने भी एक मंदिर प्रकरण में इनका नाम व एक लोगों को पीटने के आरोप लगाए थे और पूरे जिले में इसका तगड़ा विरोध हुआ था। हालांकि कुछ दिनों पहले इस मामले का पटाक्षेप भी हो गया।
हो सकती है डॉ. मुकेश की चाल
राजनीति से जुड़े लोगों की मानें तो डॉ. मुकेश वर्मा ने इस्तीफा देकर बड़ी चाल खेली हो, क्योंकि डॉ. मुकेश को पार्टी इस बार टिकट न देने का मन बना चुकी थी। यह बात उन्हें भी पता थी। लेकिन पिछले दिनों से चल रहे भाजपा के घटनाक्रम व स्वामी प्रसाद मौर्य के जाने के बाद जिस तरह पिछड़े लोगों की उपेक्षा भाजपा में होने का आरोप लगाया जा रहा है, तो यह उनकी चाल भी हो सकती है। जिससे कम से कम पार्टी उनकी उम्मीदवारी को दरकिनार न किया जाए। या फिर मान मनौव्वल पार्टी के आलाकमान करें, तो टिकट देने की शर्त पर उनकी वापसी हो सके।




