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भविष्य में सीमेंट उद्योग के लिए डीकार्बोनाइजेशन ही विकल्प

By Om Prakash Verma Published October 14, 2024
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भविष्य में सीमेंट उद्योग के लिए डीकार्बोनाइजेशन ही विकल्प
भविष्य में सीमेंट उद्योग के लिए डीकार्बोनाइजेशन ही विकल्प
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सीमेंट उद्योग आधुनिक समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और वर्तमान में वैश्विक स्तर पर लगभग 7% और यूरोपीय संघ के कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के 4% के लिए जिम्मेदार है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा और कारोबार के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल में यूरोपीय संघ ने सीमेंट इंडस्ट्री के लिए साल 2030 से 2050 तक जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कुछ बदलाव किए हैं, जिसमें प्रोडक्शन सिस्टम को डीकार्बोनाइज करना एक विकल्प है। सीमेंट बिजनेस कार्बन कैप्चर स्टोरेज और टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जबकि वैकल्पिक कैमिकल की अभी भी खोज की जा रही है ताकि कम कार्बन उत्सर्जन हो सके। नेट-ज़ीरो भविष्य में जगह बनाने की तलाश कर रहे सीमेंट प्लेयर्स के लिए डीकार्बोनाइजेशन सबसे अधिक आशाजनक है, जिसमें कम कार्बन वाले क्लिंकर, मिश्रण और नए सीमेंट मेटेरियल शामिल हैं।
भारत में इस पर पहले ही काम शुरु किया जा चुका है। अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) और अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ‘ट्रांजिशनिंग इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स’ पहल में शामिल होकर अदाणी मुंद्रा क्लस्टर का गठन किया है। इस पहल का उद्देश्य को-लोकेटेड कंपनियों के विज़न को संगठित कर, आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और 2050 तक डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देना है। अंबुजा सीमेंट्स के निदेशक, करण अदाणी का मानना है कि “अदाणी मुंद्रा क्लस्टर एक एकीकृत ग्रीन हाइड्रोजन मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की आकांक्षा रखता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के उन क्षेत्रों में डीकार्बोनाइजेशन करने में मदद करेगा, जिन्हें कम करना मुश्किल है, और देश की ऊर्जा आयात पर निर्भरता को घटाएगा।”

ग्रीन इन्वेस्टमेंट और बिजनेस मॉडल बनाते समय सीमेंट इकोसिस्टम को कैसे संतुलित किया जाए, यह डीकार्बोनाइजेशन ट्रेजेक्टरी से निर्धारित होगा। पिछले कुछ दशकों से सीमेंट कंपनियां अपने उत्सर्जन को कम करने के लिए पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रही हैं, जैसे ईंधन दक्षता बढ़ाना और क्लिंकर और पारंपरिक ईंधन की जगह अधिक टिकाऊ विकल्प अपनाना होगा। नए डीकार्बोनाइजेशन टेक्नोलॉजी को विकसित करने पर होने वाले बड़े निवेश ने इंडस्ट्री को इनोवेशन के विकल्प को अपनाने पर मजबूर कर दिया है।
सीमेंट उद्योग को कार्बन मुक्त करना पहले कभी इतना महत्वपूर्ण नहीं था। वैश्विक स्तर पर, सीमेंट का ग्रीन हाउस-गैस (जीएचजी) उत्सर्जन कुल उत्सर्जन का लगभग 7% है, जो अब तक का सबसे बड़ा क्षेत्रीय कार्बन फुटप्रिंट है। सीमेंट और कंक्रीट उद्योग ने उत्सर्जन को कम करने और यहां तक ​​कि खत्म करने के लिए नए लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जैसे कि ग्लोबल सीमेंट और कंक्रीट एसोसिएशन (जीसीसीए) द्वारा निर्धारित किए गए लक्ष्य साल 2020 के स्तर की तुलना में 2030 तक प्रति मैट्रिक टन सीमेंट में सीओटू में 20% की कमी और प्रति घन मीटर कंक्रीट में सीओटू में 25% की कमी लाना है। जीसीसीए ने 2050 तक पूर्ण डीकार्बोनाइजेशन का आह्वान किया है।

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Om Prakash Verma October 14, 2024
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