ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: फर्क इसे पड़ता है कि पहल कौन करता है
Share
Notification Show More
Latest News
इसरो ने की नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 की सफल लॉन्चिंग, सेना होगा फायदा… पीएम मोदी ने दी बधाई
October 31, 2026
कबीरधाम के दिव्यांग तैराकों ने रचा इतिहास, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जीते 8 पदक
October 31, 2026
किसानों की सुविधा के लिए सरकार का बड़ा निर्णय, छत्तीसगढ़ में 360 नए धान खरीदी केन्द्रों की स्वीकृति
October 31, 2026
अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन : हैदराबाद में 78 की उम्र में ली अंतिम सांस
October 30, 2026
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी, छत्तीसगढ़ के 24 लाख 59 हजार 707 किसानों के खातों में पहुंची राशि
October 30, 2026
Aa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Aa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
ChhattisgarhDurg-BhilaiFeatured

फर्क इसे पड़ता है कि पहल कौन करता है

By Om Prakash Verma Published November 20, 2022
Share
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
SHARE

अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस की संध्या पर आयोजित एक संगीत संध्या में सुनी हुई बात दिल को छू गई. खिटपिट से टूटते रिश्ते, बिखरते परिवार और टूटते याराना पर उन्होंने एक टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि फर्क इससे नहीं पड़ता कि समस्या का समाधान कैसे होगा. फर्क इससे भी नहीं पड़ता कि समस्या का हल कौन निकालेगा. फर्क तो इससे पड़ता है कि समस्या के समाधान के लिए पहल कौन करता है. सही भी है. चारों तरफ अफरातफरी का माहौल है. लोग खुद ही सोच लेते हैं कि उनकी बातों की आगे क्या प्रतिक्रिया होगी. कौन हां कहेगा. किससे ना सुनने को मिलेगी. इस तरह वे उस व्यक्ति के अधिकार का अतिक्रमण करते हैं जो सकारात्मक प्रतिक्रिया देने के लिए पूरी तरह से तैयार था. जब यही प्रक्रिया घर के भीतर या रिश्तों के बीच अपनाई जाती है तो अच्छे खासे चल रहे रिश्ते भी चटक जाते हैं. संस्थागत परेशानियों की बात करें तो पूर्वाग्रह यहां भी हमें आगे नहीं बढऩे देता. हम अकसर उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते, जो हमारे लिए तय था. वजह यही है कि हम किसी को पनपता हुआ नहीं देख पाते. यहां पेड़ों से सीख लेने की जरूरत है. यदि पेड़ जड़ों को आगे बढऩे से रोकें तो क्या होगा? जड़ें गहराई तक जाएंगी तभी पेड़ ऊंचा उठ पाएगा. यदि जड़ों को गमले में बांध दिया गया तो पेड़ भी बौने होकर ही रह जाते हैं. देश की अधिकांश संस्थाएं आज इसी रोग की गिरफ्त में हैं. छोटी-छोटी इकाइयां अपने मातहत काम कर रहे लोगों की भर्ती तो उनके गुण दोष और उपलब्धियां देखकर करती हैं पर फिर उन्हें एक ऐसे तंग घेरे में कैद कर देती हैं कि वे अपना हंड्रेड परसेन्ट तो क्या फिफ्टी परसेन्ट भी परफारमेन्स नहीं दिखा पाते. जाहिर है वे परफार्म नहीं करेंगे तो कंपनी की भी अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा. हम मशीनों से तो उनकी फुल कैपेसिटी में काम लेते हैं पर इंसानों को ऐसी छूट देने में हमें डर लगता है. हमारा यही डर हमें प्रतिस्पर्धी बनने से रोकता है. हमारे पास टीम तो होती है पर वह इतने नियंत्रण में होती है कि अपना स्वाभाविक प्रदर्शन नहीं कर पाती. दरअसल, यह पूरा गणित संवाद कला पर टिका हुआ है. स्कूलों में बच्चों को कविता पाठ, भाषण और वाद-विवाद के जरिए वाककला में निपुण बनाने की कोशिशें की जाती हैं. पर जैसे जैसे बच्चा ऊपर की कक्षाओं की ओर बढ़ता है, उससे हम उसके विकास की यह लाठी छीन लेते हैं. वह किताबों और कापियों में डूबकर रह जाता है. उसे संवाद कला की फिर से याद दिलाई जाती है जब वह अपनी स्नातक स्तर तक की शिक्षा पूरी कर लेता है. परसनालिटी डेवलपमेंट के नाम पर उसे फिर से एक बार स्टेज पर खड़ा कर दिया जाता है. पर तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. संवाद कला का यही ह्रास उसके जीवन को नष्ट कर देती है.

You Might Also Like

इसरो ने की नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 की सफल लॉन्चिंग, सेना होगा फायदा… पीएम मोदी ने दी बधाई

कबीरधाम के दिव्यांग तैराकों ने रचा इतिहास, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जीते 8 पदक

किसानों की सुविधा के लिए सरकार का बड़ा निर्णय, छत्तीसगढ़ में 360 नए धान खरीदी केन्द्रों की स्वीकृति

अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन : हैदराबाद में 78 की उम्र में ली अंतिम सांस

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी, छत्तीसगढ़ के 24 लाख 59 हजार 707 किसानों के खातों में पहुंची राशि

Om Prakash Verma November 20, 2022
Share this Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article जो खोया है उसकी आह आह, जो बच गया है उसकी वाह वाह करो : राष्ट्र संत ललितप्रभ जो खोया है उसकी आह आह, जो बच गया है उसकी वाह वाह करो : राष्ट्र संत ललितप्रभ
Next Article दूध लेने गई थी युवती, डेयरी मालिक व कर्मचारी के साथ बीएसएफ के जवानों ने लूट ली आबरू… केस दर्ज

Ro.No.-14097/18

× Popup Image

Ro. No.-14093/1

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?