रायपुर (एजेंसी)। प्रदेश में पेट्रोल-डीजल में वैट कम करने को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वाणिज्य-कर मंत्री टीएस सिंहदेव के अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने जहां अपने बयान से वैट नहीं घटाने के संकेत दिए हैं, तो वहीं मंत्री टीएस सिंहदेव ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को प्रस्ताव भेजने की बात कही है। इधर, सत्ता पक्ष के इन दिग्गजों के अलग-अलग बयानों को लेकर राजनीति भी शुरू हो गयी है। पेट्रोल-डीजल में वैट को लेकर सत्ता पक्ष से आए दो अलग-अलग बयानों ने छत्तीसगढ़ में विपक्ष को फिर एक बार मौका दे दिया है।
दरअसल, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जब वैट कम करने को लेकर सवाल किया गया तब उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्र को ही यूपीए सरकार के समय तक की एक्साइज ड्यूटी लाने की नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि यूपीए के समय जो टैक्स नौ रुपये था वो 27 और 23 रुपये हो चुका है। इसलिए पहले केंद्र एक्साइज ड्यूटी को उस स्तर पर ले आए, क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार ने वैट में कोई बढ़ोत्तरी की ही नहीं।
वहीं प्रदेश के वाणिज्यिक कर मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि जिस दिन केन्द्र सरकार ने वैट की दरों में कटौती की घोषणा की थी, उसी दिन से संभावनाएं तलाशी जा रही है और विभाग की ओर से एक प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। सत्ता पक्ष से पेट्रोल और डीजल में वैट घटाने को लेकर आये इन दो बयानों पर बीजेपी ने तंज कसा है। बीजेपी नेता श्रीचंद सुंदरानी का कहना है कि सरकार की स्थिति अलग-अलग बैंड पर अलग-अलग रेडियो के बजने की तरह हो गई है और मत भिन्नता दिखाई देती है जबकि कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला का ये कहना है कि दोनों ही नेताओं के बयान एक जैसे ही हैं।
छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल से वैट कम करने के लिए बीजेपी लगातार कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में बीजेपी कांग्रेस पर हमलावर होने का कोई भी मौका नहीं छोडऩा चाहती। देखना होगा कि वैट को लेकर आगे किस तरह के प्रदर्शन होते हैं और कांग्रेस सरकार का का रुख क्या होता है?




