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पृथ्वी के दुर्लभ तत्वों के बाजार पर चीन के बढ़ते प्रभुत्व ने अमेरिका सहित कई देशों की बढ़ाई टेंशन

By Om Prakash Verma
Published: January 23, 2023
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पृथ्वी के दुर्लभ तत्वों के बाजार पर चीन के बढ़ते प्रभुत्व ने अमेरिका सहित कई देशों की बढ़ाई टेंशन
पृथ्वी के दुर्लभ तत्वों के बाजार पर चीन के बढ़ते प्रभुत्व ने अमेरिका सहित कई देशों की बढ़ाई टेंशन
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हॉन्गकॉन्ग (एजेंसी)। पृथ्वी के दुर्लभ तत्वों के बाजार पर चीन के बढ़ते प्रभुत्व ने अमेरिका समेत कई बड़े देशों की टेंशन बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन का पृथ्वी के दुर्लभ तत्वों के बाजार पर इस तरह से हावी होने से एकाधिकार का खतरा बढ़ता जा रहा है। वास्तव में, चीन ने 2021 में 61 प्रतिशत वैश्विक दुर्लभ तत्वों का उत्पादन किया, जो कि 168,000 टन के बराबर था जो एक बड़ी बढ़त मानी जा रही है। इतना ही नहीं दुनिया के चुंबक उत्पादन का 85 प्रतिशत हिस्सा भी चीन से निकलता है। यह बढ़त चीन की मोनोपोली को और बल देने का काम करेगी।

अमेरिका समेत कई विरोधी देशों के लिए झटका
अमेरिका समेत कई विरोधी देश जो चीन के ऊपर से अपनी निर्भरता कम करने पर आमादा है उनके लिए इस तरह की रिपोर्ट एक तरह से बड़ा झटका है। अमेरिका हर हाल में आर्थिक मोर्चे पर चीन को झटका देना चाहता है लेकिन यह रिपोर्ट उसकी मंशा पर पानी फेरती नजर आ रही है।

दुर्लभ तत्वों के मामले में चीन के आसपास कोई देश नहीं
चीन के पास अनुमानित 44 मिलियन टन दुर्लभ पृथ्वी भंडार है। आकार में इसके आधे हिस्से के साथ वियतनाम, ब्राजील और भारत हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के पास केवल 1.8 मिलियन टन है। इसका वार्षिक उत्पादन चीन का भी केवल एक चौथाई है, कुल 2021 उत्पादन का 15.5 प्रतिशत। इस क्षेत्र में चीन का उदय 1980 और 1990 के दशक के वैश्वीकरण के दौरान हुआ। इसकी खदानें सरकारी सब्सिडी, पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान न देने और श्रमिकों के लिए कम वेतन की बदौलत फली-फूलीं। इस प्रकार, इसके उत्पादों ने बाजार में बाढ़ ला दी और विदेशों में कई प्रतिस्पर्धियों को व्यापार से बाहर कर दिया।

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