-दीपक रंजन दास
पुरानी कहावत है- ‘पानी पिओ छान कर, गुरू बनाओ जान कर’। स्वयं स्वामी विवेकानंद ने भी ऐसा ही किया था। रामकृष्ण परमहंस फक्कड़ संत थे। वे कहते थे कि मैं रुपया-पैसा नहीं छू सकता। नरेन्द्र दत्त उन्हें गुरू मानते थे। पर ‘पैसा नहीं छू सकता’ वाली बात पर उन्हें ज्यादा यकीन नहीं था। उन्होंने गुरू की परीक्षा लेने की ठानी। एक दिन जब परमहंस विश्राम कर रहे थे तो नरेन्द्र ने उनके शरीर से एक सिक्के का स्पर्श करा दिया। स्वामी जी पीड़ा से कराह उठे। नरेन्द्र ने इसके बाद कभी अपने गुरू पर संदेह नहीं किया। नरेन्द्र आगे चलकर स्वामी विवेकानंद कहलाए और पोंगा पंडिताई की जमकर आलोचना की। पर इन दिनों बाबाओं को गुरू बनाना एक फैशन स्टेंटमेंट जैसा हो गया है। बड़े-बड़े बाबा होने लगे हैं। उनकी चमक दमक और गेटअप ही बता देता है कि वे ईश्वर के काफी करीब पहुंच चुके हैं। लोगों की इन बाबाओं में अंधी श्रद्धा भी है। गुरू भले ही अदालत में बलात्कारी साबित हो जाए पर शिष्यों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वे अपराधी के समर्थन में सड़कों पर उतर आते हैं। यह किस्सा सतगुरु आश्रम झीमकी चौकी कोतबा का है। एक शिष्य ने यहां तांत्रिक छत्रमोहन यादव से अपनी परेशानी का हल पूछा। तांत्रिक छत्रमोहन ने उपाय भी बताया। मामला एक यादव परिवार से जुड़ा है। जशपुर बागबहार के महेशपुर के इस परिवार में दो भाई और एक बहन थी। एक भाई अपनी पत्नी के साथ रायगढ़ के भगवानपुर में रहता था। दोनों माली का काम करते थे और बमुश्किल अपना गुजारा चला पाते थे। दूसरा भाई खेत संभालता था। वह मानसिक रोगी था। घर के बाकी सदस्य भी बदहाली के ही शिकार थे। मामले को तांत्रिक के पास लेकर गया था परिवार की एकमात्र कन्या का पति। तांत्रिक ने उसे ज्ञान दिया कि रायगढ़ में रहने वाले भाई ने ही अपने भाई पर जादू-टोना किया है ताकि वह मंदबुद्धि हो जाए। उसका इरादा लौटकर अपनी जमीन पर कब्जा करना है। इससे बचने का भी एक वीभत्स हल उसने बताया। उसने कहा कि यदि किसी तरह रायगढ़ निवासी दंपति की हत्या कर दी जाए तो जादू-टोना कट जाएगा। इसके साथ ही सभी संकट स्वयमेव हटते चले जाएंगे और परिवार मालामाल हो जाएगा। उन्होंने सुझाव मान लिया और किराए की बोलेरो लेकर रायगढ़ पहुंच गए। दोनों को किसी बहाने से गाड़ी में बैठाया और रास्ते में उनकी हत्या कर दी। इसके बाद शवों को सीमेन्ट पोल के टुकड़ों से बांधकर उफनती महानदी में फेंक दिया। शव किसी तरह किनारे लग गए और पुलिस ने मामले का खुलासा कर दिया। अब जीजा अपने चचेरे भाइयों समेत जेल में है। दिन वाकई फिर गए हैं। अब वे करोड़ों रुपए की विशाल इमारत में रहते हैं। चारों तरफ सशस्त्र सिपाहियों का पहरा है।
गुस्ताखी माफ: सतगुरू आश्रम से मिला ऐसा गुरू ज्ञान कि….




