-दीपक रंजन दास
छत्तीसगढ़ के पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर अपने तीखे तेवरों के कारण जाने जाते हैं। कोरबा जिला में उनका एकाएक दादरभांठा जनपद पंचायत की महिलाओं से आमना-सामना हो गया। महिलाएं कलेक्टर के पास सड़क की शिकायत को लेकर पहुंची थीं। विधायक पर नजर पड़ते ही महिलाओं ने उन्हें घेर लिया। बातचीत का स्टैंडर्ड फार्मेट शुरू हो गया। महिलाओं ने कहा कि सड़क पर कीचड़ ही कीचड़ है, सीसी रोड बनवा दीजिए। विधायक कंवर ने कहा बजट आते ही काम हो जाएगा। वे बैठक में भी इस बात को रखेंगे। इसपर महिलाओं ने ताना दिया कि वोट मांगने के लिए तो आ जाते हैं, काम के समय बहाने बनाते हैं। इसपर कंवर भड़क गए। उन्होंने कहा- ‘आपने वोट दिया है, मैं आपका नौकर हूँ। पर इसका मतलब यह नहीं है कि आप कुछ भी कह दोगे।Ó विधायक ने सही कहा। वैसे भी महिलाओं को विपक्षी दल के विधायक से कोई खास उम्मीद भी नहीं थी। वे तो सीधे कलेक्टर से मिलने आई थीं। विधायक जी तो यूं ही टकरा गये थे। दरअसल मामला आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ है। नौकर सिर्फ अपनी सेवाएं बेचता है, अपना आत्मसम्मान गिरवी नहीं रखता। नौकर और गुलाम में फर्क होता है। गुलाम से आप कुछ भी कह सकते हो, कुछ भी करवा सकते हो। उसका अपना कोई वजूद नहीं होता। इस बात से अगर सहमत न हो तो अपने घर की कामवाली से आएं-बाएं बक कर देखना। तत्काल काम न छोड़ दे तो कहना। साथ ही पूरे मोहल्ले में आपको बदनाम भी करके रख देगी। दूसरी कामवाली बाई भी नहीं मिलेगी। उसे अपने सम्मान की परवाह है और अपनी ताकत का अंदाजा भी। कामवाली ने काम छोड़ा तो अपनी डाक्टरी-कलेक्टरी छोड़कर आपको झाड़ू-पोंछा-बर्तन खुद करना पड़ेगा। मरे हुए तो वो होते हैं जो अपनी डिग्री की बदौलत निजी क्षेत्र में व्हाइट कॉलर जॉब करते हैं। अपनी नौकरी बचाने के लिए वो कुछ भी सुनने को तैयार रहते हैं। आप उन्हें गालियां दे सकते हैं। उन्हें उन बातों के लिए भीं फटकार सकते हैं, जिसके लिए वो जिम्मेदार नहीं हैं। वो सब कुछ सुन लेगा। माफी भी मांग लेगा। नौकरी उसके लिए सिर्फ वेतन नहीं, बल्कि उसकी पहचान भी है, जिसे वह किसी भी कीमत पर गंवाना अफोर्ड नहीं कर सकता। पर सरकारी नौकर और नेता पर ये बातें लागू नहीं होतीं। वे भले ही कहलाते जनता के सेवक हों पर असल में वे सरकार के नौकर होते हैं। आपको जितना कोसना है, सरकार को कोस लें पर सरकार के नौकरों को कोसने का आपको कोई हक नहीं है। बल्कि उनके काम में अड़ंगा डालने पर आपको सीधे गिरफ्तार किया जा सकता है, सजा हो सकती है। नौकर-नौकर का फर्क है साहब।
गुस्ताखी माफ: मैं नौकर हूं तो क्या? कुछ भी बोल दोगे




