-दीपक रंजन दास
एक बाप ने लाठी से पीट-पीट कर अपनी किशोरी बेटी की हत्या कर दी। इसके बाद पुलिस को गुमराह करने के लिए उसकी जींस उतार दी और अद्र्धनग्न अवस्था में उसके शव को श्मशान में छोड़ दिया। ऑनर किलिंग का यह विचित्र मामला रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र का है। ग्राम कवई जमरगा की एक कोरवा किशोरी की दोस्ती गांव के ही एक अन्य युवक से थी। घटना की रात किशोरी के पिता उधर से गुजरे तो बेटी को एक युवक के साथ देखकर वे तैश में आ गए। उन्हें देखते ही युवक वहां से भाग खड़ा हुआ। नाराज बाप ने बेटी की लाठी से इतनी पिटाई की कि उसकी मौत हो गई। गुस्सा शांत हुआ तो पुलिस का डर सताने लगा। जितना पढ़ा-सुना था उसके आधार पर ही उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। उसने बेटी की जींस उतार दी और कपड़े अस्तव्यस्त कर दिये। इसके बाद वह घर आ गया। उसने गांव वालों को बेटी के लापता होने की सूचना दी। गांव वाले किशोरी की मां के साथ उसे ढूंढने निकले। उन्हें श्मशान के पास उसका शव मिल गया। उन्होंने पुलिस को सूचना दी और यह भी बता दिया कि उन्हें किशोरी के पिता पर ही शक है। पुलिस ने थोड़ी सख्ती से पूछताछ की तो पिता ने पूरी कहानी सुना दी। क्रोध और हिंसा दोनों दुधारी तलवारें हैं। यह दोनों को बराबर घायल करती है। परिवार की नाक बचाने के लिए जिस बेटी की हत्या कर दी, शव को अद्र्धनग्न कर उसी की मिट्टी खराब की। पहली गलती जहां क्रोध और हिंसा के कारण हुई वहीं दूसरी चूक अपना अपराध छिपाने की कोशिश में हो गई। हिंसा का रास्ता अपनाने वालों के साथ ऐसा ही होता है। आक्रोश में आकर वे ऐसी हरकतों को अंजाम दे बैठते हैं कि बाद में उसपर पर्दा डालना मुश्किल हो जाता है। वैसे ढीठ लोगों की बात और है। वे सीना ठोंककर कह देते हैं कि हमने जो किया, ठीक किया। तुम्हें जो करना है, कर लो। पर सभ्य समाज में ये दोनों ही अस्वीकार हैं। इन दिनों देश भर में आक्रोश और हिंसा को बढ़ावा देने की कोशिशें हो रही हैं। छिछोरे वक्तव्यों को हवा दी जा रही है। कभी सुधी संपादक ऐसे वक्तव्यों को प्रकाशित नहीं कर मुल्क में अमन चैन कायम रखने में अपना अंशदान करते थे। पर अब जमाना टीआरपी का है। जिसकी जितनी ज्यादा टीआरपी, उसकी उतनी अधिक कमाई। ब्रेकिंग न्यूज एक नया क्लासिफिकेशन है। इसमें अधपकी-अधकचरा खबरों को पूरे जोश के साथ परोसा जाता है। जिसने सिर्फ उतना ही पढ़ा-सुना वह उसे ही सच मान बैठता है। फिर प्रतिक्रियाओं का एक ऐसा सिलसिला शुरू हो जाता है जिसे रोक पाना किसी के लिए भी संभव नहीं होता।
गुस्ताखी माफ: बेटी की हत्या कर उतार दी उसकी जींस




