-दीपक रंजन दास
कोरोना काल में बड़ी संख्या में लोग एपीएल से बीपीएल हो गए। दो साल में बिलासपुर का ही आंकड़ा लें तो यहां 52 हजार से भी अधिक नए बीपीएल कार्ड बने हैं। दो साल पहले जिले में 3 लाख 76 हजार 219 बीपीएल राशन कार्ड थे जबकि अब संख्या बढ़कर 4 लाख 28 हजार 949 हो गई है। राजधानी रायपुर में यह संख्या और भी अधिक है। वैसे भी एपीएल बनना स्टेटस सिम्बल से ज्यादा कुछ नहीं है। थोड़ी सी आमदनी बढ़ी नहीं कि आदमी बीपीएल से एपीएल हो जाता है। इसके साथ ही वह बीपीएल को मिलने वाली तमाम सुविधाओं से भी वंचित हो जाता है। जिस एपीएल श्रेणी में वह जाता है वहीं लखपति और करोड़पति भरे पड़े हैं। उसकी हालत धोबी के कुत्ते जैसी हो जाती है, न घर का – न घाट का। इसलिए जब कोरोना काल में मौका मिला तो वह चुपचाप वापस बीपीएल हो गया। खुद सरकार का मानना है कि प्रधानमंत्री अन्न योजना, बीपीएल गैस सिलिंडर और सबसे बढ़कर आयुष्मान कार्ड में मिलने वाला 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज इसका सबसे बड़ा कारण है। हालांकि इसमें कुछ मामले वास्तविक हैं। जिन परिवारों में एकमात्र कमाऊ सदस्य की मृत्यु हो गई, उनकी हालत बहुत दयनीय है। पर ऐसे लोगों की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती है। इससे थोड़े ज्यादा वो लोग हैं जिन्होंने कोरोना के दौरान अपना रोजगार गंवा दिया। दो साल किसी तरह जीवित रहे। ऐसे लोगों को भी राहत की जरूरत थी। दरअसल, एपीएल और बीपीएल तय करने के मापदंड में ही बड़ा झोल है। 5-10 हजार की मामूली नौकरी मिलते ही व्यक्ति बीपीएल से एपीएल हो जाता है। सरकार मान लेती है कि अब उसकी माली हालत इतनी अच्छी हो गई है कि वह एक रुपये के बजाय दस रुपए किलो चावल खरीद सकता है। उसे अब सरकारी आवास योजना की कोई जरूरत नहीं है। वह अपना मकान खुद खरीद सकता है। इलाज के लिए लाखों रुपए की व्यवस्था वह खुद कर सकता है। कामकाजी व्यक्ति आयुष्मान योजना के तहत केवल 50 हजार रुपए तक का इलाज करवा सकता है जबकि बीपीएल श्रेणी के लोग 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज करा सकते हैं। उसे सस्ते गैस सिलिंडर की भी जरूरत नहीं है। वह हजार रुपए की गैस तो खरीद ही सकता है। दरअसल असली बीपीएल तो वह है जिसे हमने एपीएल मान लिया है। उसका संघर्ष ज्यादा है। जेब में फूटी कौड़ी न हो पर उसे स्टैंडर्ड मेनटेन करना होता है। एक टुच्ची नौकरी उसका सौतन बन बैठी है। सरकार को चाहिए कि वह बीपीएल की परिभाषा बदले। भोजन, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। इसपर टुच्ची राजनीति न करे।





