-दीपक रंजन दास
साहिर लुधियानवी ने एक नज्म लिखी थी जो टूटे दिलों को नई दिशा दिखाती है. फिल्म गुमराह में लिये गये इस गीत का एक अंश कहता है – ‘वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन, उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोडऩा अच्छा. छत्तीसगढ़ में शराब बंदी की मांग एक अर्से से हो रही है पर सरकार इसकी घोषणा नहीं कर रही. शराब बंदी करने वाले राज्यों में ऐसा नहीं है कि शराब मिलती नहीं है. खूब मिलती है. थोड़ी महंगी मिलती है, चोरी छिपे शराब पीने का रोमांच भी होता है. छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री प्रेम साय सिंह टेकाम इस सत्य से वाकिफ हैं कि पूर्ण शराब बंदी केवल एक शिगूफा मात्र है. सरकार ने शराब बंदी कर दी तो इसकी तस्करी शुरू हो जाएगी, पीने वाले पिएंगे और पुलिस वाले कमाएंगे. अकेले सरकार अंगूठा चूसती रह जाएगी. इसलिए जिस चीज की टोटल बंदी संभव न हो, उसके साइड इफेक्ट्स को कम करने की कोशिश करनी चाहिए. शायद इसीलिए वे शराब पीने का सलीका सिखा आए. उन्होंने कहा कि शराब को पहले पानी मिलाकर डायल्यूट करना चाहिए. कितना डायल्यूट करना है इसे सीखना चाहिए. शराब को गटागट नहीं बल्कि चुस्कियां लेकर धीरे-धीरे पीना चाहिए. होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में इसके बारे में विस्तार से पढ़ाया जाता है. यहां सोमेलियर (जाम बनाने की कला) की ट्रेनिंग होती है. सोमेलियर एक शानदार करियर भी है. दिक्कत केवल यह हो गई कि वे नशा मुक्ति पर बोल रहे थे और सुनने वाले स्कूली विद्यार्थी थे. यह घटना बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर की है. उन्होंने कवि हरिवंशराय बच्चन की कविता भी सुनाई कि मंदिर-मस्जिद बैर कराते, एक कराती मधुशाला. उन्होंने सहजता से इसे स्वीकार भी किया कि वे भी कभी कभी इसका उपयोग करते हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि चुनावों में इसका उपयोग किया जाता है, बाकी जगहों पर भी इसका उपयोग किया जाता है. दिक्कत यह भी हुई कि उनके इन बोलबचनों की रिकार्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. पर लोगों को उनपर गुस्सा नहीं आ रहा. वे मुग्ध हैं कि किस तरह कोई मंत्री अपने करियर का रिस्क उठाकर अपने दिल की बातें कर सकता है. कोई कह रहा है -इसे कहते हैं मन की सच्ची बात। अब शराब की लत नहीं छोड़ी जाती तो न सही, कम से कम उसे पीने का सही सलीका तो सीख लो. अमेरिका, यूरोप जैसे देश शराब पीकर भी तरक्की कर रहे हैं और अपने यहां का बेवड़ा शराब पीकर नालियों में गिर रहा है, बीमार हो रहा है, लिवर सुजा रहा है, झगड़े कर रहा है. शिक्षा मंत्री जानते हैं कि यह सब शराब की वजह से नहीं बल्कि उसे गलत ढंग से पीने के कारण हो रहा है. वे शिक्षा मंत्री हैं इसलिए लोगों को शराब पीने का सही तरीका बताना भी उनका फर्ज है. इसीलिए कहते हैं वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन, उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोडऩा अच्छा.
गुस्ताखी माफ: …उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोडऩा अच्छा




