दुर्ग। छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के तत्वधान में छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद टेक्निकल यूनिवर्सिटी भिलाई, में ”एनर्जी सिम्यूलेशन फॉर एनर्जी कंसर्वेशन बिल्डिंग कोड” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 23 मार्च एवं 24 मार्च 2022 को किया गया। ज्ञात हो कि शासन द्वारा क्रेडा को इसके राज्य अभिहीत नोडल एजेंसी नामित किया गया है। भवनों में ऊर्जा संरक्षण के लिये केन्द्र द्वारा ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (एनर्जी कंसर्वेशन बिल्डिंग कोड) को 2017 में संशोधित कर लागू कर किया गया । देश के दो केन्द्र शासित प्रदेशों सहित 20 राज्यों में इसका अनुपालन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में भी ई.सी.बी.सी को प्रदेश की जलवायु अनुकूल एवं ऊर्जा आवश्यकता अनुसार संशोधित करके लागू करने की प्रक्रिया जारी है।

कार्याशाला की अध्यक्षता भानुप्रताप, अधीक्षण अभियंता, क्रेडा जोनल कार्यालय दुर्ग द्वारा की गई। सी.एस.वी.टी.यू के विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग के निदेशक डॉ.पी.के घोष ने बिल्डिंग सेक्टर में ऊर्जा दक्षता के महत्व एवं प्रदेश में ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता को लागू करने की आवश्यकता पर अपने विचार प्रस्तुत किये। टेक्निकल सेशन एवं सॉफ्टवेयर ट्रेनिंग बी.ई.ई द्वारा प्रमाणित चेन्नई से आए मास्टर ट्रेनर महेश कुमार द्वारा विस्तार पूर्वक प्रेजेटेशन के माध्यम से जानकारी दिया गया है। कार्यशाला की द्वितीय दिवस आज स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय एम.के. वर्मा द्वारा अपने उद्घोषण में ऊर्जा संरक्षण के महत्व पर जोर दिया तथा बी.ई.ई. एवं क्रेडा द्वारा आयोजित कार्यक्रम की सराहना किया।

क्रेडा के एनर्जी एफिशियंसी बिल्डिंग सेल की मैनेजर आर्किटेक्ट नीना रायचा एवं सीनियर काउंसलर प्रीति गुप्ता ने बताया कि ऊर्जा संरक्षण एवं ऊर्जा दक्षता का उचित प्रबंधन कर के ऊर्जा की लगभग 40 प्रतिशत खपत कम की जा सकती है। देश की कुल उत्पादित ऊर्जा की 33 प्रतिशत खपत भवनों के निर्माण, संचालन एवं रखरखाव में होती है। इसमें से 08 प्रतिशत खपत व्यावसयिक भवनों में तथा 24 प्रतिशत आवासीय भवनों में होती है। छत्तीसगढ़ ई.सी.बी.सी के संशोधित प्रारूप में वे व्यावसयिक भवन अथवा परिसर जिनका कनेक्टड लोड 50 किलो वॉट या अधिक या कॉन्ट्रेक्ट डिमांड 60 के.व्ही.ए या अधिक या कुल निर्मित क्षेत्रफल 1000 वर्ग मीटर या अधिक हो इसके दायरे में आयेंगे। आवासीय भवनों तथा परिसरों के लिये इस कोड को सरलीकृत करके इको निवास संहिता 2018 में लागू किया गया। इसके दायरे में वे आवास या परिसर आयेंगे जिसका प्लांट एरिया 500 वर्ग मीटर या अधिक हो। छत्तीसगढ़ राज्य में भवन अनुज्ञा की प्रक्रिया के साथ ही ऊर्जा अनुज्ञा को सम्मिलित किया जायेगा। कार्यक्रम में क्रेडा के जिला प्रभारी टी.आर. ध्रुव, परियोजना समन्वयक कुशल तिवारी, उप अभियंता सुश्री अंकिता गवाली तथा तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं एम.टेक के छात्र-छात्राऐ उपस्थित रहें।




