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क्राइसिस मैनेजमेंट में मौन रहने का महत्व – अतुल मलिकराम

By Om Prakash Verma
Published: August 7, 2023
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क्राइसिस मैनेजमेंट में मौन रहने का महत्व - अतुल मलिकराम
क्राइसिस मैनेजमेंट में मौन रहने का महत्व - अतुल मलिकराम
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कभी-कभी चुप रहना, जवाब देने से ज्यादा प्रभावी हो सकता है
बेशक क्राइसिस मैनेजमेंट कठिन हो सकता है, लेकिन कुछ समय के लिए रुकने और शांत रहने से आपको अपनी ब्रांड प्रतिष्ठा की रक्षा करने में मदद मिल सकती है। कुछ स्थितियों में, एक टूल के रूप में मौन का उपयोग करना आवेगपूर्ण प्रतिक्रिया देने से अधिक प्रभावी हो सकता है। जानना चाहेंगे, कैसे?

पीआर में दो दशकों से अधिक के अनुभव और पीआर सलाहकार के रूप में, मैंने व्यवसायों और व्यक्तियों को संकट की स्थितियों का सामना करते देखा है, जो उनकी प्रतिष्ठा बना या बिगाड़ सकते हैं। हर नकारात्मक टिप्पणी या समीक्षा पर तुरंत कार्रवाई करने और प्रतिक्रिया देने का दबाव भारी पड़ सकता है, लेकिन कभी-कभी, सबसे अच्छी बात यह है कि कुछ भी न कहें।

हर किसी को अपने जीवन में किसी न किसी मोड़ पर संकट का सामना करना पड़ता है, लेकिन जब यह आपके पेशेवर जीवन पर हावी हो जाता है, तो भावनाएँ, तनाव और चिंता और भी अधिक भारी हो सकती है। लेकिन जैसा कि कहा जाता है, समय के पास हर मुश्किल का काट है, समय को उसका काम करने के लिए भरपूर समय दिया जाए, तो आपको लंबे समय के लिए अपनी ब्रांड प्रतिष्ठा की रक्षा करने में मदद मिल सकती है।

जब भी कोई क्राइसिस आता है, उस समय सबसे पहले आपको कुछ करने की आवश्यकता होती है, तो शांत रहने की। समय या प्रतिष्ठा में ऊँच-नीच को अपनी आंतरिक शांति पर कभी-भी हावी न होने दें। एक बार जब आप खुद को तैयार कर लेते हैं, तो अगला कदम 5 डब्ल्यू (क्या, कब, कहाँ, कौन और क्यों) सवाल पूछकर क्राइसिस की प्रकृति को समझना है। इससे आपको नुकसान को कम करने के लिए क्राइसिस मैनेजमेंट प्लान (सीएमपी) बनाने में मदद मिलेगी।

क्राइसिस पर कुछ भी प्रतिक्रिया देने से पहले आप मौन की शक्ति को जान लें। कुछ स्थितियों में, कम्युनिकेशन शोर बन सकता है, लेकिन वहीं मौन इससे भी अधिक कामगर हो सकता है। हर नकारात्मक टिप्पणी या समीक्षा का आवेगपूर्वक जवाब देने के बजाए, स्थिति की गहराई को जानने और उसका आकलन करने के लिए कुछ समय लें। कभी-कभी चुप रहना जवाब देने से ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

कई कारणों से मौन एक शक्तिशाली उपकरण हो सकता है। सबसे पहले, यह बुरी स्थिति के आगे बढ़ने से रोककर अच्छी स्थिति को फैलाने में मदद कर सकता है। दूसरे, यह गलत बात कहकर स्थिति को और खराब होने से बचाने में आपकी मदद कर सकता है। अंत में, यह दिखा कर कि आप स्थिति को गंभीरता से ले रहे हैं और इसे सावधानी से संभाल रहे हैं, अपने आप में एक बयान दे सकता है।

इसे बतौर उदाहरण समझें, तो हाल ही में, एक वेजीटेरियन कस्टमर को गलती से नॉन-वेजीटेरियन फूड डिलीवर कर देने के बाद एक फूड डिलीवरी बिज़नेस पर कंट्रोवर्सी बढ़ गई। ग्राहक की शिकायत से हँगामा मच गया और ब्रांड ने चुप रहकर एक समझदारी भरा निर्णय लिया। यदि ब्रांड ने इसे सुलझाने की कोशिश की होती, तो मामला हाथ से निकल गया होता। इस सिलसिले में उनकी चुप्पी फायदेमंद रही।

कुल मिलाकर, क्राइसिस मैनेजमेंट बेशक कठिन हो सकता है, लेकिन शांति से काम लेने और कुछ समय मौन रहने से आपको अपनी ब्रांड प्रतिष्ठा की रक्षा करने में मदद मिल सकती है। हर नकारात्मक टिप्पणी या समीक्षा का आवेगपूर्वक जवाब देने के बजाए, स्थिति का आकलन करने और कार्रवाई का सर्वोत्तम तरीका निर्धारित करने के लिए कुछ समय लें। याद रखें, किसी संकट पर काबू पाने में मौन एक शक्तिशाली हथियार हो सकता है।

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