भिलाई। पूरी क्षमता के साथ स्कूल खोदने का छत्तीसगढ़ सरकार का आदेश खटाई में पड़ता दिख रहा है। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में स्वयं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विदेशों से आवाजाही नियंत्रित करने की मांग उठाई थी। इसके बाद केबिनेटमंत्री मोहम्मद अकबर और अब संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने भी कोरोना के नए वैरिएंट को देखते हुए स्कूल बंद करने की मांग की है। पेरेंट्स बच्चों के भविष्य को लेकर पहले ही चिंतित हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूलों को पूरी क्षमता के साथ शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के पश्चात स्कूलों में रौनक लौटी लेकिन पेरेंट्स की चिंताएं कम नहीं हो पाई है। हालांकि फिलहाल कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रॉन की दस्तक नहीं हुई है, किन्तु इसके प्रभाव ने दहशत फैलाना शुरू कर दिया है। लोगों में मास्क और सेनीटाइजर के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग के पालन में भी लापरवाही देखी जा रही है। इसके अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र समेत कई राज्य के स्कूलों में कोरोना विस्फोट की खबरें भी चिंता बढ़ाने वाली है। यही वजह है कि कोरोना को लेकर सरकार की चिंता सामने आई है। राज्य में पिछले कुछ दिनों में कोरोना की रफ्तार अचानक ही बढ़ गई है। मरीजों की संख्या भी तीन गुना से ज्यादा हो गई है। सोमवार को केबिनेटमंत्री व सरकार के प्रवक्ता मोहम्मद अकबर की चिंता भी झलकी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार स्कूलों को पूरी क्षमता के साथ खोले जाने के फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है। हालांकि उनका कहना था कि स्कूलों को 100 फीसदी क्षमता के साथ खोलने का फैसला मंत्रिपरिषद का था और अब अंतिम फैसला भी उसे ही करना है।
भूपेश कैबिनेट ने 22 नवंबर की बैठक में छत्तीसगढ़ में पूरी क्षमता के साथ स्कूल खोले जाने को लेकर फैसला हुआ। अब शिक्षा विभाग इसे लेकर आदेश जारी कर चुका है। कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लग गई। सोमवार से ही स्कूल शुरू किए जाना था। हालांकि स्कूल में कोरोना गाइडलाइन का पालन पूरी तरह से करना होगा। अब तक प्रदेश में स्कूल 50 फीसदी क्षमता के साथ खोले जा रहे थे। स्कूल पूरी तरह से खोलने पर तब शिक्षा मंत्री प्रेमसाय ने कहा था कि छात्रों की पढ़ाई पहले ही काफी ज्यादा प्रभावित हो चुकी है। ऐसे में अब और पढ़ाई प्रभावित न हो इसलिए यह फैसला लिया गया है।
कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर उपजी चिंताओं के बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विदेशों से आवाजाही को नियंत्रित करने की मांग उठाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन देशों में कोरोना का नया वैरिएंट मिला है, वहां से आवाजाही पर रोक लगाई जानी चाहिए। राज्य में सबसे ज्यादा मरीज राजधानी रायपुर और दुर्ग जिले में ही मिल रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान यह दोनों जिले बुरी तरह प्रभावित हुए थे। ऐसे में न केवल इन दो जिलों अपितु पूरे छत्तीसगढ़ के पेरेंटेस चिंतित हैं। इधर, संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने भी सरकार से स्कूलों को बंद करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा, केन्द्र सरकार को इसके रोकथाम के लिए कुछ करने के पूर्व हमें स्वयं ही कड़े निर्णय लेने की जरूरत है। छत्तीसगढ़ में 9 साल के बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक संक्रमण के दायरे में आ गए हैं। ऐसे में यह उचित होगा कि समय पूर्व सबसे पहले शैक्षणिक संस्थानों को पूर्व की भांति पूरी तरह से बंद रखा जाए। उन्होंने आगाह करते हुए कहा, जिस तरह से छत्तीसगढ़ में छोटे शहरों से लेकर अन्य जगहों में कुछ लोग मास्क नहीं पहन रहे हैं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। यह बहुत ही चिंताजनक है। लोगों के बीच अब कोविड-19 को लेकर बातचीत भी बंद हो गई है। विकास उपाध्याय ने मास्क के लिए कड़े नियम बनाते हुए मास्क नहीं लगाने वालों पर बड़ा जुर्माना लगाने का भी सुझाव दिया है।
ओमीक्रान के 50 म्यूटेशन
ओमिक्रान पर विशेषज्ञों ने जो राय दी है उसके अनुसार इसमें कुल मिलाकर 50 म्यूटेशन हुए हैं। 30 से अधिक म्यूटेशन तो स्पाइक प्रोटीन में हुए हैं। ज्यादातर वैक्सीन वायरस के प्रोटीन पर हमला करते हैं और इन्हीं के जरिए वायरस भी शरीर में प्रवेश करता है। वायरस के हमारे शरीर की कोशिकाओं से संपर्क बनाने वाले हिस्से की बात करें तो इसमें 10 म्यूटेशन हुए हैं। जबकि दुनिया भर में तबाही मचाने वाला डेल्टा वैरिएंट में मात्र दो म्यूटेशन हुए थे। इससे साफ जाहिर है कि ओमिक्रान ने कहीं छत्तीसगढ़ में दस्तक दी तो लोगों के लिए परेशानी खड़ा कर सकती है। विकास उपाध्याय ने केन्द्र सरकार से विशेषज्ञ दल के गठन की मांग की है। उन्होंने कहा, सरकार को एक स्वतंत्र विशेषज्ञों का आयोग गठन किया जाना चाहिए जो महामारी के खिलाफ कार्य का एक निष्पक्ष मूल्यांकन कर सके। उन्होंने कहा, स्वास्थ्य सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है। केन्द्र और राज्य सरकारें मिलकर यदि काम करें तो देश स्वास्थ्य सिस्टम को बेहद मजबूत किया जा सकता है।




