भिलाई। दो बार टलने के बाद इस बार स्थानीय निकायों के चुनाव पक्के तौर पर होने की गुंजाइश बढ़ी है। आगामी 12 नवम्बर को प्रदेश निर्वाचन आयोग की अहम् बैठक होने जा रही है। संभावना है कि इस बैठक में कलेक्टरों से फीडबैक लेकर चुनाव तारीखों का ऐलान कर दिया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो तत्काल प्रभाव से आचार संहिता भी लागू हो जाएगी। संभव है कि मध्य जनवरी के आसपास चुनाव करा लिए जाएं। जिले में भिलाई, रिसाली और चरोदा नगर निगमों के अलावा जामुल पालिका क्षेत्र में चुनाव होने हैं।
कोरोना महामारी के चलते लगातार चलते रहे स्थानीय निकायों के चुनाव जल्द ही हो सकते हैं। इसके संकेत मिलना प्रारम्भ हो गए हैं। निकाय चुनावों की सुगबुगाहट के साथ ही राजनीतिक दलों में गहमागहमी बढ़ गई है। चुनाव तैयारियों को लेकर कांग्रेस जिला मुख्यालय में प्रादेशिक बैठक कर रही है। वहीं भाजपा भी काफी समय से अंदरूनी तौर पर तैयारियों को अंजाम दे रही है। वार्डों में संभावित दावेदारों ने सक्रियता बढ़ा दी है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो जिले के जिन निकायों में चुनाव होने हैं, वहां वार्डों का परिसीमन, वार्ड आरक्षण को लेकर दावा-आपत्ति मंगाने, मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन और शासकीय कर्मियों की बूथ स्तर पर ट्रेनिंग जैसे कार्य कर लिए गए हैं। जाहिर है कि 12 नवम्बर को होने वाली बैठकों में कलेक्टर, निर्वाचन आयोग को यही फीडबैक देंगे। जिसके बाद यह तय माना जा रहा है कि आयोग चुनावी तैयारियों पर संतुष्टि जाहिर करते हुए अगली प्रक्रियाओं पर अमल करेगा।
उल्लेखनीय है कि भिलाई और रिसाली नगर निगमों के चुनाव पिछले साल 2020 में होने की संभावना थी, किन्तु कोरोना महामारी के चलते प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। नतीजतन तारीखों को आगे बढ़ा दिया गया। संभावना जताई गई कि निर्वाचन आयोग ने मई 2021 में चुनाव करा सकता है। इसके चलते राजनीतिक दल फिर से सक्रिय हुए, किन्तु एक बार फिर कोरोना की दूसरी लहर आई और चुनाव की पूरी प्रक्रिया की खटाई में पड़ गई। पिछले काफी समय से कोरोना की तीसरी लहर की संभावना जाहिर की जा रही थी, जिसके चलते यह अनुमान था कि वर्षांत में होने वाले चुनावों को फिर से टाला जा सकता है। किन्तु राज्य में बेहतर टीकाकरण और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और कोरोना से निपटने के बेहतर इंतजामात के चलते तीसरी लहर का आना टल गया। यही वजह है कि अब निर्वाचन आयोग बैठक करने जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों का दावा है कि इस बार चुनाव की तारीखों पर अंतिम मुहर लग जाएगी।
चुनावी इलाकों में बढ़ी सक्रियता
जिन-जिन क्षेत्रों में स्थानीय निकायों के चुनाव होने हैं, वहां सरकार और प्रशासनिक मशीनरी की सक्रियता बढ़ गई है। दुर्ग जिले में भिलाई जैसा बड़ा निगम शामिल है। इसके अलावा रिसाली व चरोदा जैसे नगर निगमों व जामुल पालिका में चुनाव होने हैं। इस लिहाज से सत्तारूढ़ दल के लिए दुर्ग जिले की अहमियत बढ़ गई है। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री का गृहजिला होने की वजह से यहां चुनाव की चाक-चौबंद तैयारियां की जा रही है। प्रदेश सरकार के लिए ये चुनाव नाक की लड़ाई है। अभी विधानसभा चुनाव को करीब दो साल का वक्त है। लेकिन माना जा रहा है निकाय चुनाव के नतीजों से मतदाताओं का मूड़ भांपने का एक अवसर मिलेगा।
खत्म हो चुका है कार्यकाल
भिलाई समेत जामुल पालिका का कार्यकाल काफी पहले खत्म हो चुका है। भिलाई निगम में कलेक्टर प्रशासनिक कामकाज देख रहे हैं। वहीं रिसाली निगम का यह पहला चुनाव होगा। भिलाई निगम से काटकर और कुछ ग्रामीण इलाकों को मिलाकर यह नगर निगम बनाया गया था। भिलाई निगम में जहां 70 वार्ड है, वहीं रिसाली क्षेत्र में 40 वार्डों में चुनाव होने हैं। भिलाई में महापौर का पद अनारक्षित है तो रिसाली में अन्य पिछड़ा वर्ग (महिला) के लिए आरक्षित है। इधर, इस साल के अंत में भिलाई चरोदा निगम का कार्यकाल भी खत्म होने जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, सभी निकाय क्षेत्रों में चुनाव की तैयारियां पूरी कर ली गई है।
15 निकायों में होने है चुनाव
छत्तीसगढ़ के कुल 15 निकायों में चुनाव होने हैं। ये चुनाव कोरोना की वजह से टल गए थे। इनमें 4 नगर निगम, 5 नगर पालिका और 6 नगर पंचायतें शामिल है। राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक, सभी निकायों में चुनावी तैयारियां पूरी की जा चुकी है। फिर भी निर्वाचन आयोग अपने स्तर पर अंतिम समीक्षा करना चाह रहा है। इसीलिए 12 नवम्बर को बैठक रखी गई है। इस बैठक में चुनाव वाले जिलों के सभी कलेक्टरों को बुलाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, सभी निकायों में कुल 370 वार्ड और 963 मतदान केन्द्र हैं। प्रदेश के कई नगर निगमों व पालिका क्षेत्रों में वार्ड की सीटें खाली है। इनकी संख्या करीब 30 बताई जा रही है। यहां भी लगे हाथ चुनाव होंगे।




