ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: अब नक्सलियों की मांद के रूप में नहीं, लीची से बनेगी अबूझमाड़ की पहचान
Share
Notification Show More
Latest News
स्वास्थ्य मंत्री के जन्मदिवस पर योग आयोग अध्यक्ष ने नवजात को दिया ‘श्याम’ का नाम
स्वास्थ्य मंत्री के जन्मदिवस पर योग आयोग अध्यक्ष ने नवजात को दिया ‘श्याम’ का नाम
October 1, 2026
shreekanchanpath 348 # 01 September 2026
October 1, 2026
डेटा लेबलिंग और एआई में बलरामपुर ने रचा इतिहास, प्रदेश का पहला कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर स्थापित
October 1, 2026
संबलपुर की चर्चिका बनीं ‘ग्लोबल आइकॉन ऑफ इंडिया’, रायपुर में लहराया परचम
October 1, 2026
गैर-आवासीय खेल अकादमी चयन ट्रायल… 144 खिलाड़ियों ने कराया पंजीयन
October 1, 2026
Aa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Aa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
ChhattisgarhFeaturedRaipur

अब नक्सलियों की मांद के रूप में नहीं, लीची से बनेगी अबूझमाड़ की पहचान

By @dmin Published June 11, 2022
Share
अब नक्सलियों की मांद के रूप में नहीं, लीची से बनेगी अबूझमाड़ की पहचान
अब नक्सलियों की मांद के रूप में नहीं, लीची से बनेगी अबूझमाड़ की पहचान
SHARE

मुख्यमंत्री के निर्देश पर मसाहती खसरा बंटा तो
अबूझमाड़ के किसानों को जगी नई उम्मीद
मुख्यमंत्री के निर्देश पर 200 एकड़ में लगेंगे लीची के पौधे
बिहार को टक्कर देगी अबूझमाड़ की लीची
अबूझमाड़ के किसान लीची की मिठास से होंगे मालामाल

रायपुर। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अबूझमाड़ अपनी नई पहचान बनाने जा रहा है । कभी नक्सलियों के गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले अबूझमाड़ अब अपनी नई पहचान बनाने जा रहा है। लीची का नाम सुनकर अमूमन बिहार के मुजफ्फरपुर इलाके का नाम याद आता है। लेकिन अब इस कहानी में जरा ट्विस्ट आने वाला है. छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र की मीठी लीची भी मुजफ्फरपुर की लीची को टक्कर देने मैदान में आ रही है।

लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देश पर अबूझमाड़ क्षेत्र में सर्वे और मसाहती खसरा वितरण का कार्य जोर शोर से चल रहा है और अब इसके परिणाम दिखना शुरू हो गये हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर इस क्षेत्र में 200 एकड़ में लीची के पौधों का रोपण किया जाएगा साथ ही जिन किसानों को मसाहती खसरा मिल गया है उन सभी को 20 से 30 पौधे दिए जाएंगे । उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों के खेतों में पौधों का रोपण किया जायेगा और उन्हें ट्रेनिंग भी देंगे।

अब सब कुछ सही चला, तो लीची इस इलाके को नई पहचान दे सकती है. लीची के पौधे को लंबी सर्दी और पर्याप्त बारिश की जरूरत होती है और अबूझमाड़ का क्षेत्र इस हिसाब से अनुकूल है । साल 1995 में ओरछा के शासकीय उद्यान में 100 पौधों का रोपण किया गया था जो अब पर्याप्त फल दे रहे हैं। इस छोटी सी सफलता ने उम्मीद को रोशनी दिखाई है। अबूझमाड़ की जलवायु, मिट्टी और मौसम लीची के बागानों के लिए उपयुक्त है, इसलिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बस्तर के अपने भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान नारायणपुर के ओरछा में 200 एकड़ क्षेत्र में लीची के पौधे लगाने के निर्देश दिए थे. जिस पर अमल शुरू हो गया है।

इस वजह से उपयुक्त है अबूझमाड़
अबूझमाड़ का क्षेत्र घनघोर जंगल है, इस वजह से यहां बारिश पर्याप्त होती है। इस क्षेत्र में छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक वर्षा होती है। अबूझमाड़ की समुद्र तल से 16 सौ मीटर ऊंचाई होने के कारण आद्र्रता और शीतल जलवायु लीची के लिए उपयुक्त जलवायु है।

मिठास के साथ मालामाल करेगी लीची
लीची का सीजन मुश्किल से एक महीने का होता है। 10 मई के आसपास फल लगना शुरू होते हैं, और 10 जून से पहले ही इसका सीजन खत्म हो जाता है। लेकिन एक माह से भी कम समय में प्रति हेक्टेयर 2 सौ पौधों के हिसाब से 4 से 5 लाख रुपये की आमदनी हो जाती है।

नहीं पड़ती मार्केटिंग की जरूरत
सीजन छोटा होने की वजह से लीची की बाजार में इतनी डिमांड है कि मार्केटिंग की जरूरत ही नहीं पड़ती है। व्यापारी बागानों से एडवांस में बुकिंग कर लेते हैं। ओरछा शासकीय उद्यान में लगे लीची के सौ पौधों के फल आने से पहले ही व्यापारी आकर बुकिंग कर लेते हैं।

ऐसे बिखरती है लीची की मिठास
लीची के पौधे से आय करना बहुत ही आसान है. इसके पौधों को लगाना बहुत आसान है. यदि पर्याप्त बारिश होती है, तो सिर्फ गर्मी के सीजन में पौधे को पानी देना होता है। खाद भी बहुत कम लगती है. इसके पौधे की खास बात है कि पांच साल में ही फल देने लगता है। एक सीजन में एक पेड़ में 20 किलो लीची लगती है, जो औसतन 120 रुपये किलो बिकती है। यही पेड़ 10 साल बाद प्रति सीजन 1 क्विंटल तक फल देता है।

मसाहती सर्वे के बाद किसानों को लीची रोपण की ट्रेनिंग
अबूझमाड़ क्षेत्र में सर्वे और मसाहती खसरा वितरण का कार्य जोर शोर से चल रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर इस क्षेत्र में 200 एकड़ में लीची के पौधों का रोपण किया जाएगा साथ ही जिन किसानों को मसाहती खसरा मिल गया है उन सभी को 20 से 30 पौधे दिए जाएंगे । उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों के खेतों में पौधों का रोपण किया जायेगा और उन्हें ट्रेनिंग भी देंगे ।

You Might Also Like

स्वास्थ्य मंत्री के जन्मदिवस पर योग आयोग अध्यक्ष ने नवजात को दिया ‘श्याम’ का नाम

डेटा लेबलिंग और एआई में बलरामपुर ने रचा इतिहास, प्रदेश का पहला कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर स्थापित

संबलपुर की चर्चिका बनीं ‘ग्लोबल आइकॉन ऑफ इंडिया’, रायपुर में लहराया परचम

गैर-आवासीय खेल अकादमी चयन ट्रायल… 144 खिलाड़ियों ने कराया पंजीयन

बेटिकट यात्रियों की धरपकड़ : हथबंद रेलवे स्टेशन पर सरप्राइज चेकिंग में एक लाख से ज्यादा का जुर्माना

@dmin June 11, 2022
Share this Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article 23 करोड़ की लागत से बनेगी सब्जी मंडी, कुम्हारी के सभी स्कूलों का होगा जीर्णोद्धार भेंट-मुलाकात: मुख्यमंत्री ने पत्थलगांव विधानसभा के ग्राम बटईकेला में ग्रामीणों से लिया योजनाओं का फीडबैक
Next Article ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में गौठानों की अहम भूमिका: सीएम भूपेश बघेल ग्राम सभा में पारित नहीं होगा तो नहीं लगेगा प्लांट : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

Ro.No.-13998/18

× Popup Image

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?