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अजगर को अपने अंडे सेने के लिए 54 दिनों तक रोक दिया नेशनल हाईवे का काम, इस कम्पनी की हो रही जमकर तारीफ

By @dmin
Published: May 16, 2022
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अजगर को अपने अंडे सेने के लिए 54 दिनों तक रोक दिया नेशनल हाईवे का काम, इस कम्पनी की हो रही जमकर तारीफ
अजगर को अपने अंडे सेने के लिए 54 दिनों तक रोक दिया नेशनल हाईवे का काम, इस कम्पनी की हो रही जमकर तारीफ-file pic
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नई दिल्ली (एजेंसी)। एक सांप को अंडे सेने के लिए पुल के काम को रोकने का बेहद खास मामला सामने आया है। दरअसल यूरालुंगल लेबर कॉन्ट्रैक्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (ULCCS) केरल के कासरगोड में फोर-लेन हाईवे का निर्माण कर रही है। इसने 54 दिनों के लिए एक पुलिया के निर्माण कार्य को इसलिए स्थगित कर दिया, ताकि एक अजगर अपने 24 अंडे दे सके।

वन विभाग, कंपनी और एक समर्पित सांप बचावकर्ता ने सांपों को दुनिया में लाने के लिए बेहद सराहनीय प्रयास किया। सांप को बचाने वाले अमीन अदकथबैल ने रविवार को कहा, सभी 24 अंडों से बच्चे निकल गए हैं। हमने कल 15 बच्चों को जंगल में छोड़ा और नौ को आज रात छोड़ दिया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, 20 मार्च को, CPCRI के पास एरियाल में NH 66 के चौड़ीकरण के हिस्से के रूप में एक पुलिया का निर्माण करने वाले श्रमिकों ने भारतीय रॉक अजगर को एक मांद के अंदर घूमते हुए देखा जिसके बाद उन्होंने वन विभाग को सूचित किया।

मांद को संभवत: एक साही जानवर द्वारा बनाया गया था। यह सड़क लेवल से चार फीट नीचे थी और अगर अर्थमूवर ने पुलिया के लिए मिट्टी नहीं खोदी होती तो यह कभी भी नहीं दिखती। वन विभाग ने अमीन को बुलाया, जो जीवन यापन के लिए एल्युमीनियम निर्माण इकाई चलाते हैं, और पिछले 10 वर्षों से सांपों को बचा रहे हैं। विभाग ने यूएलसीसीएस को पुलिया पर काम स्थगित करने पर विचार करने को भी कहा है।

कासरगोड के संभागीय वन अधिकारी पी बीजू ने कहा, हालांकि यह एक समयबद्ध परियोजना है, लेकिन इसने इसके लिए सहमति दे दी। एनएचएआई के पास जाना और काम रोकने की इजाजत लेना बोझिल होता है। गौरतलब है कि अजगरों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची ढ्ढ के तहत वर्गीकृत किया गया है और भारत में बाघों के समान उच्च-स्तरीय कानूनी संरक्षण प्राप्त है।

जब अमीन ने बिल के अंदर जाकर देखा, तो उन्होंने कई अंडे पाए और अजगर ने खुद को उनके चारों ओर लपेटा हुआ था। उन्होंने नेपाल के मिथिला वाइल्डलाइफ ट्रस्ट में एक पशु चिकित्सक और वन्यजीव अनुसंधान के प्रमुख मवीश कुमार से संपर्क किया और जाना कि इसे कैसे अंजाम दिया जाना है। कुमार कासरगोड के रहने वाले हैं। अमीन ने कहा, मवीश ने मुझे सलाह दी कि मैं अंडे को ट्रांसफर न करूं क्योंकि अजगर मां की गर्मी के बिना अंडे नहीं निकल सकते हैं।

अजगर के अंडों को इनक्यूबेट करने के लिए 27 डिग्री सेल्सियस और 31 डिग्री सेल्सियस के बीच नियंत्रित तापमान की आवश्यकता होती है। तापमान में वृद्धि से बच्चे मृत पैदा हो सकते हैं या विकृतियों के साथ पैदा हो सकते हैं। अंडों को सही तापमान पर रखने के लिए मदर स्नेक अंडे के चारों ओर घेरा बनाती है। एक बार जब यूएलसीसीएस ने अंडे सेने तक कहीं और काम करने का फैसला किया, तो अमीन ने दिन में एक या दो बार सांप और अंडों की देखरेख का रुटीन बना लिया। अजगर के अंडे सेने में लगभग 60 से 65 दिन लगते हैं।

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