रायपुर। अगहन माह का पहला गुरुवार आज है, पौराणिक मान्यतानुसार अगहन माह महालक्ष्मी का महीना माना गया है। इस माह के गुरुवार को धन देवी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से सुख-शांति व समृद्धि मिलती है। घर आंगन से लेकर पूजा के कमरे तक चावल आटे का चौक व रंगोली से सजावट,फूल आंवले,आमपत्ता,केले पत्ते की टहनी,कच्चा सिंघाड़ा,बेर,कंद,चना भाजी के साथ धूप दीप से मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु की पूजा छत्तीसगढ़ के अधिकांश घरों में आज महिलाओं ने सूर्योदय से पहले करते हुए इसकी शुरुआत की है। अब दोपहर व संध्या की पूजा क्रमश: करेंगेे।

हिंदू मान्यता के अनुसार सुबह शुभ मुहूर्त में महिलाओं ने हल्दी और आंवले का उबटन लगाकर स्नान करने के बाद ही पूजा-अर्चना में शामिल हुईं। पूजा के बाद खीर, पूड़ी, और अन्य पारंपरिक व्यंजन भोग के रूप में अर्पित किए.अगहन मास के हर गुरुवार पूजा जो भोग लगाया जाता उस प्रसाद को घर के बाहर नहीं बांटा जाता, क्योंकि मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं। ग्रामीण अंचल में विशेष रूप से नए चावल से बने पकवान, जैसे फरा और पूड़ी, भोग में शामिल करेंगे। अगहन मास के हर गुरुवार को यह पूजा अलग-अलग प्रकार के पकवानों और विधियों के साथ की जाती है।
पहला गुरुवार खास महत्व रखता है, क्योंकि इसे नए फसल के उपयोग की शुरुआत के रूप में भी देखा जाता है। यह परंपरा परिवार और समाज के बीच जुड़ाव और समृद्धि का संदेश देती है। शास्त्रगत मान्यताओं के आधार पर अगहन गुरुवार में व्रत रखने का विधान है। इस दिन स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प महिलाओं द्वारा किया जाता है। इसके अलावा शाम को चंद्रमा के उदित होने के उपरांत पुष्प, नैवेध, धूम, दीप प्रज्वलित कर भगवान गणेश की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यतानुसार अगहन माह महालक्ष्मी का महीना माना गया है। इस माह के गुरुवार को धन देवी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से सुख-शांति व समृद्धि मिलती है।




