स्पोर्ट्स डेस्क (एजेेंसी)। भारतीय महिला क्रिकेट टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैके में खेले गए दूसरे एकदिवसीय मैच में हार का सामना करना पड़ा। यह मैच टीम इंडिया अपनी गलतियों से नहीं हारी बल्कि अंपायर के फैसले ने हरा दिया। इस मुकाबले में भारत जीत की दहलीज पर खड़ा था। लेकिन एक नो बॉल के फैसले ने भारत को जीत से दूर कर दिया। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया के महिला क्रिकेट टीम तीन वनडे मैचों की सीरीज में 2-0 से आगे हो गई। अंपायर द्वारा दी गई उस नो बॉल पर कई लोगों ने सवाल उठाए।

क्या हुआ था आखिरी ओवर में
ऑस्ट्रेलिया की पारी का आखिरी ओवर झूलन गोस्वामी फेंकने आईं। उस समय कंगारू टीम को अंतिम ओवर में मैच जीतने के लिए 13 रनों की दरकार थी। 50वें ओवर की पहली गेंद जो फुल टॉस थी उस पर बेथ मूनी ने तीन रन लिए। दूसरी गेंद लेग स्टंप के बार थी जिस पर कैरी ने दो रन बनाए। झूलन की तीसरी गेंद पर एक न बाइ के रूप में मिला। चौथी गेंद पर लेग बाई के रूप में एक रन मिला। पांचवीं गेंद पर फिर कैरी ने दो रन लिए। छठी गेंद फुल टॉस थी जिस पर महिला बैटर कैरी का कैच मिड विकेट पर लपका गया। लेकिऩ अंपायर ने इसे नो बॉल करार दिया। एक तरफ भारतीय टीम जीत का जश्न मनाने लगी। लेकिन अंत में अंपायर को फैसले को मान्य किया गया जिसके चलते भारत के हाथ से यह मैच निकल गया। अगली गेंद जो फ्री हिट थी उस कैरी ने दो रन लेकर भारत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
लोग हुए नाराज
अंपायर द्वारा आखिरी गेंद को नो बॉल देने के बाद बहस करने वाले दो गुटों में बंट गए। कई लोगों का मानना था कि अंपायर ने लीगल गेंद को नो बॉल दिया है। पूर्व महिला क्रिकेटर लिजा स्थालेकर भी यह नहीं समझ पा रही थीं कि आखिर अंपायर ने उसे नो बॉल क्यों दिया। कुछ लोगों का कहना था कि अगर यह पुरुषों का मैच होता तो अंपायर नो बॉल नहीं देता।
भारत ने बनाए 274 रन
इस मुकाबले में भारत ने बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 274 रन बनाए थे। टीम इंडिया की तरफ से सलामी बैटर स्मृति मंधाना ने 86 रनों की पारी खेली। ऑस्ट्रेलिया को मैच जीतने के लिए 275 रनों का लक्ष्य मिला। एक समय भारत इस मुकाबले में मजबूत स्थिति में था जब ऑस्ट्रेलिया ने 52 रन पर 4 विकेट खो दिए थे। लेकिन अंपायर द्वारा आखिरी ओवर की अंतिम गेंद को नो बॉल देने के बाद यह मुकाबला भारत के हाथ से निकल गया।




