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राहत भरी रिपोर्ट : तीसरी लहर में संक्रमित बच्चों के अधिक गंभीर बीमार होने के साक्ष्य नहीं

By @dmin Published June 13, 2021
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Relief from Korana also disaster: After 70 days in the country lowest 84,332 new cases
Relief from Korana also disaster: After 70 days in the country lowest 84,332 new cases
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नई दिल्ली (एजेंसी)। देश में कोरोना की तीसरी लहर आने पर संक्रमित बच्चों के अधिक गंभीर रूप से बीमार पडऩे के ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं। लैंसेंट कोविड मिशन इंडिया टास्क फोर्स ने अब तक के आंकड़ों की समीक्षा के बाद यह दावा किया है। अध्ययन में दिल्ली-एनसीआर, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र के दस अस्पतालों से लिए आंकड़ों को शामिल किया गया। तीसरी लहर में बच्चों पर असर को लेकर एम्स के तीन बाल चिकित्सकों की सलाह से रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें बताया गया कि अधिकतर बच्चों में संक्रमण के लक्षण नहीं दिखते। जिनमें लक्षण मिलते भी हैं तो वह हल्के या मध्यम होते हैं जिनका घर पर ही चिकित्सीय सलाह से इलाज हो जाता है। अब तक दो लहरों में महज 2600 बच्चों को ही अस्पताल ले जाना पड़ा है। जिन बच्चों मे मधुमेह, कैंसर, खून की कमी और कुपोषण जैसी पूर्व बीमारियां थीं उनकी हालत ही अधिक बिगड़ी। सामान्य रूप से स्वस्थ बच्चों में कोरोना से जान गंवाने का खतरा न के बराबर है।

ये लक्षण होंगे, घबराएं नहीं डॉक्टर की सलाह मानें
रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर बच्चों में बुखार, जुकाम या डायरिया के लक्षण जैसे पेट में दर्द, उलटी के लक्षण देखने को मिलेंगे। ऐसे मामलों में बिना घबराये डॉक्टरों की सलाह मानें तो बच्चे जल्द ही घर में ही स्वस्थ हो जाएंगे। इसमें भी 10 से कम उम्र वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा अधिक उम्र वालों की तुलना में कम ही होगा।

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बच्चों के नियमित टीकाकरण में भारी गिरावट
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बच्चों के नियमित टीकाकरण में भारी गिरावट पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की। एक अधिकारी ने शनिवार को बताया, देश भर में एक वर्ष से कम उम्र के अनुमानित 20 लाख से 22 लाख बच्चों को हर महीने राष्ट्रीय कार्यक्रमों के तहत टीकाकरण के लिए लक्षित किया जाता है, जो प्रति वर्ष लगभग 260 लाख बच्चों में तब्दील होता है। लेकिन कोरोना वायरस महामारी के दौरान बच्चों का नियमित टीकाकरण कार्यक्रम काफी प्रभावित हुआ।

नहीं लग पाए डीटीपी, एमएमआर टीके 
कई स्वास्थकर्मियों का मानना है कि महामारी के दौरान अधिकतर माता-पिता अपने बच्चों को डीटीपी, न्यूमोकोकल, रोटा वायरस और एमएमआर जैसी बीमारियों के खिलाफ जरूरी नियमित टीकाकरण से चूक गए। ज्यादातर लोग इस दौरान खुद को और बच्चों को कोरोना संक्रमण पकडऩे के डर से टीकाकरण केंद्रों में लाने से डर गए, जिससे ये जरूरी टीके नहीं लग पाए।

नियमित टीकाकरण में 60 प्रतिशत की गिरावट 
कोलंबिया एशिया अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ सुमित गुप्ता ने बताया, हमने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान नियमित टीकाकरण में लगभग 60 प्रतिशत की गिरावट देखी, जो पिछले साल की गिरावट दर से अधिक है। इसका कारण है, कई लोग कोरोना काल में अस्पतालों का दौरा करने से डर रहे हैं और कुछ लोग टीकाकरण से चूक गए, क्योंकि वे लॉकडाउन के कारण यात्रा नहीं कर सके।
उन्होंने बताया, टीकाकरण में एक या दो महीने की देरी हो सकती है, लेकिन बच्चों में सही समय पर प्रतिरक्षा की सही मात्रा पैदा करने के लिए अनिवार्य टीके निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दिए जाने चाहिए।

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