भिलाई (श्रीकंचनपथ न्यूज़)। मध्यप्रदेश की तर्ज पर भाजपा छत्तीसगढ़ में भी कई सांसदों को चुनाव मैदान में उतारने जा रही है। पार्टी ने अपनी पहली सूची में एक सांसद विजय बघेल को सीएम भूपेश बघेल के खिलाफ प्रत्याशी बनाया था। जो जानकारियां मिल रही है, उसके मुताबिक, मध्यप्रदेश का पूरा-पूरा फार्मूला छत्तीसगढ़ और राजस्थान में लागू नहीं किया जाएगा। इसकी वजह यह है कि मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है, जबकि छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पार्टी विपक्ष में है। हाल ही में दिग्गज कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह इशारा किया था कि राजस्थान में सरकार बनाना थोड़ा मुश्किल होगा। जबकि बाकी के दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार रिपीट हो रही है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक राहुल गांधी की बातों को पूरी तरह सच नहीं मान रहे हैं। यह सच है कि राजस्थान में भाजपा के लिए अच्छी गुंजाइश है, जबकि छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस व विपक्षी दल भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है। मध्यप्रदेश में कुछ सीटों से पिछडऩे की आशंका पार्टी को है, इसीलिए केन्द्रीय स्तर के नेताओं को टिकट दी गई है।

जानकारियों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा की रणनीति मध्यप्रदेश से अलग होगी। पार्टी नेतृत्व इन दोनों राज्यों में भी कुछ बड़े नेताओं को तो चुनाव लड़ा सकता है, लेकिन मध्यप्रदेश की तर्ज पर सभी बड़े नेताओं को नहीं उतारा जाएगा। इसकी एक बड़ी वजह दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार होना है। राजस्थान में भाजपा संभलकर उम्मीदवार तय करना चाह रही है, क्योंकि वहां वसुंधरा राजे को साधना बेहद जरूरी है। इस साल के आखिर में चुनाव तो पांच राज्यों में हो रहे हैं, लेकिन भाजपा के लिए सबसे ज्यादा अहम छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान है। ये तीनों राज्य भाजपा के गढ़ हैं और लोकसभा की 75 में से पार्टी के पास 72 सीटें हैं। ऐसे में वह इन राज्यों के विधानसभा चुनावों में जीत के लिए कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती। रणनीति के तहत वह हारी हुई सीटों पर ज्यादा मेहनत कर रही है। मध्य प्रदेश में भाजपा ने हाल में अपने अधिकांश बड़े नेताओं को विधानसभा के चुनाव मैदान में उतार दिया है, जिनमें तीन केंद्रीय मंत्री, चार सांसद और एक राष्ट्रीय महासचिव हैं।
कुछ सांसदों पर दाँव लगाने की तैयारी
भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी नई रणनीति के तहत बड़े नेताओं को उतार रही है, लेकिन हर राज्य की जरूरत और रणनीति अलग है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी बड़े नेता उतारे जाएंगे, लेकिन मध्य प्रदेश जैसा ही हो, यह जरूरी नहीं है। मध्य प्रदेश में भाजपा बीते लगभग दो दशक से सत्ता में है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में वह विपक्ष में है। ऐसे में सत्ता विरोधी माहौल अलग-अलग है। राजस्थान में तो हर पांच साल में सत्ता बदल रही है। ऐसे में बड़े नेताओं को कहां कितना दांव पर लगाना है, वहां की परिस्थिति पर निर्भर करेगा। छत्तीसगढ़ में भाजपा पहले ही एक सांसद विजय बघेल को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सीट पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। प्रदेश अध्यक्ष सांसद अरुण साव और सांसद सरोज पांडे को भी पार्टी चुनाव लड़ा सकती है।
दुर्ग से सरोज का नाम!
इधर, पता चला है कि पार्टी जिन सांसदों को विधानसभा चुनाव लडऩे जा रही है, उनमें एक सरोज पाण्डेय भी है। सरोज, दुर्ग क्षेत्र से महापौर, वैशाली नगर से विधायक व दुर्ग संसदीय क्षेत्र से सांसद रह चुकीं हैं। वर्तमान में वे राज्यसभा सांसद हैं। हालांकि सरोज पाण्डेय के करीबी सूत्रों ने ऐसी किसी खबर से साफतौर पर इनकार किया है, लेकिन भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति ने मध्यप्रदेश में सांसदों और सीनियर नेताओं को बिना भनक लगे ही प्रत्याशी घोषित कर दिया था। उम्मीद की जा रही है, छत्तीसगढ़ में भी कुछ ऐसा ही हो सकता है। राज्य के वरिष्ठ नेताओं को बिना उनकी जानकारी के विधानसभा में प्रत्याशी बनाया जा सकता है। संभावना है कि सरोज पाण्डेय को दुर्ग से प्रत्याशी बनाया जाए। वहीं प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष व सांसद अरूण साव को भी प्रत्याशी बनाए जाने की संभावना है।
11 में से 9 सांसद भाजपा के
छत्तीसगढ़ में कुल 11 लोकसभा क्षेत्र हैं। 2019 में हुए लोकसभा के चुनाव में इनमें से 9 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। जबकि इससे कुछ महीनों पहले ही छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने अभूतपूर्व बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। प्रदेश में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस को महज दो सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। यह दो सीटें बिलासपुर व बस्तर की थी। बिलासपुर से ज्योत्सना चरणदास महंत तो बस्तर से वर्तमान पीसीसी चीफ दीपक बैज ने जीत हासिल की थी। पहली सूची में भाजपा ने पूर्व सांसद व केन्द्रीय मंत्री रह चुके रामविचार नेताम को सरगुजा के रामानुजगंज क्षेत्र से टिकट दी थी। बताया जाता है कि पार्टी ने दूसरी सूची के लिए नाम तय कर रखे हैं। हालांकि प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं की व्यस्तता के चलते सूची जारी करने में विलम्ब हो रहा है। पीएम मोदी 3 अक्टूबर को बस्तर आ रहे हैं। संभव है उसी के आसपास दूसरी जारी कर दी जाए।




