ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: अदाणी फाउंडेशन के ‘साथवरो मेला’ में दिखा विविध कलाओं का संगम
Share
Notification Show More
Latest News
छत्तीसगढ़ में रेत के अवैध परिवहन पर सख्त कार्रवाई, बेमेतरा में 6 हाइवा वाहन जब्त
October 17, 2026
एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत, आत्महत्या की आशंका… जांच में जुटी पुलिस
October 17, 2026
छत्तीसगढ़ में खैर लकड़ी तस्करी मामले का बड़ा खुलासा, दो कारोड़ से ज्यादा कैश जब्त
October 17, 2026
छत्तीसगढ़ को रेलवे की बड़ी सौगात…. रायपुर-रावघाट और रायपुर-कुरुद रूट पर चलेंगी तीन नई मेमू
October 17, 2026
मुख्यमंत्री साय से एशियन गेम्स के कांस्य पदक विजेता एथलीट अनिमेष कुजूर ने की मुलाकात
October 17, 2026
Aa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Aa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
Business

अदाणी फाउंडेशन के ‘साथवरो मेला’ में दिखा विविध कलाओं का संगम

By Om Prakash Verma Published September 21, 2024
Share
अदाणी फाउंडेशन के 'साथवरो मेला' में दिखा विविध कलाओं का संगम
अदाणी फाउंडेशन के 'साथवरो मेला' में दिखा विविध कलाओं का संगम
SHARE

अदाणी शांतिग्राम के बेलवेदर गोल्फ एंड कंट्री क्लब में हुआ आयोजन
10 राज्यों के 80 से अधिक शिल्पकारों ने लगाए मेले में स्टॉल
शिल्पकारों को मिलता प्रदर्शन व आर्थिक लाभ का अवसर
अहमदाबाद/ अदाणी फाउंडेशन द्वारा 14-15 सितंबर 2024 को अहमदाबाद के अदाणी शांतिग्राम स्थित बेलवेदर गोल्फ एंड कंट्री क्लब में ‘साथवरो मेला’ का दूसरा संस्करण आयोजित किया गया। इसमें भारत की विविध कलाओं और शिल्प का प्रदर्शन देखने को मिला। इस कार्यक्रम में देशभर के स्वयं सहायता समूहों और शिल्पकारों द्वारा बनाए गए हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। शिल्पकारों को सशक्त बनाने और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ यह आयोजन शिल्पकारों और उपभोक्ताओं के बीच की दूरी को कम करने का काम भी करता है। फाउंडेशन का उद्देश्य इस मंच के माध्यम से स्थायी आजीविका और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

चंदेरी और पटोला साड़ियों से लेकर, बारीक कढ़ाई वाले कपड़े, पट्टचित्र और स्टोन डस्ट पेंटिंग्स, किफायती मैक्रमे से बुने हुए बैग और होम डेकोर आइटम्स, अनोखे नेल क्राफ्ट, पीतल के बर्तन, टेराकोटा आर्ट, मोतियों के आभूषण आदि इस प्रदर्शन में देखने को मिले। इस प्रदर्शनी को दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। यहाँ पारंपरिक और आधुनिक शिल्पों का एक विशाल संग्रह मौजूद था, जिनमें से प्रत्येक भारत की सांस्कृतिक समृद्धि की कहानी बयां कर रहा था।

इस मेले के कुछ विशेष आकर्षण, प्रदर्शनी में लगे वे दुर्लभ कलाकृतियों के स्टॉल थे, जिनमें सुजनी हस्तनिर्मित लिनेन (यह एक अनोखी कला है, जिसे भारत में केवल एक ही परिवार पीढ़ियों से आगे बढ़ा रहा है), सादेली हस्तशिल्प, और गुजरात की पारंपरिक रोगन कला (जिन्हें अक्सर विलुप्त हो रही कलाओं के रूप में जाना जाता है) शामिल थे। इस दो-दिवसीय प्रदर्शनी में ‘साथवरो’ से जुड़े 140 से अधिक शिल्पकारों के साथ, 80 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया, जिनमें स्वतंत्र शिल्पकारों और स्वयं सहायता समूहों का समन्वय था, जो भारत के विभिन्न क्षेत्रों से यहां पहुंचे थे। इस दो-

दिवसीय कार्यक्रम में 30 लाख रुपये से अधिक का व्यवसाय हुआ। आगंतुकों में अदाणी समूह के कर्मचारी और उनके परिवार शामिल थे। इस मेले के माध्यम से लोगों को कला (जिसमें कुछ विलुप्त हो रहे कला के रूप भी शामिल हैं) के बारे में जागरूकता मिली। 10 राज्यों के 80 से अधिक शिल्पकारों ने मेले में 43 स्टॉल लगाए, जिसमें 3,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया।

उमरपाड़ा, गुजरात की जनजातीय कोटवाडिया समुदाय से आने वाली शिल्पकार जसोदाबेन कोटवाडिया, जिन्होंने भूसे से बनी वस्तुओं का स्टॉल लगाया था, खुशी से मुस्कराते हुए कहती हैं,
“हमें नहीं पता था कि हमारा काम एक कला का रूप है। जो भूसे की टोकरी और दीवार पर सजाने वाले सामान हम पहले बिचौलियों को 20 रुपये प्रति पीस के हिसाब से थोक में बेचते थे, मेले में हमें उनके अच्छे दाम मिले। अदाणी फाउंडेशन ने खरीददारों और विक्रेताओं के बीच के इस अंतर को पाटकर, हमारे जैसी महिलाओं की बहुत मदद की है। उन्होंने हमें मार्गदर्शन दिया और एक ऐसा मंच प्रदान किया, जहाँ हम इस तरह की प्रदर्शनियों में अपने उत्पाद बेच सकते हैं और एक सम्मानजनक आजीविका कमा सकते हैं।”

अदाणी फाउंडेशन जसोदाबेन जैसे कलाकारों तक दूरदराज के गांवों में पहुंचकर उन्हें एक उपयुक्त और स्थायी आजीविका मॉडल खोजने में मदद करता है। फाउंडेशन एक तरफ कलाकारों की प्रतिभा को निखारना का एक लक्ष्य लेकर चल रहा है, वहीं सक्रिय रूप से गांवों को गोद भी ले रहा है, जहां महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने के महत्व के बारे में परामर्श दिया जाता है, विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षण दिया जाता है, और उन्हें स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
मेले में ओडिशा के जगन्नाथ पुरी से पट्टचित्र कलाकार ओम प्रकाश महाराणा भी शामिल हुए। वह अपने उत्पाद को अच्छी कीमत पर बेचकर संतुष्ट नजर आए। उन्होंने कहा,
“मैंने अपनी सबसे महंगी पेंटिंग, जिसकी कीमत 60,000 रुपये थी, यहां बेची। यह पहली बार है जब हम अदाणी फाउंडेशन के साथ जुड़ें हैं, और हमें बहुत खुशी है कि वे हमारे जैसे कलाकारों तक पहुंच रहे हैं और हमें हमारे ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।”
फरीदाबाद, हरियाणा के स्टोन डस्ट कलाकार सूरज ओमरे ने बताया, “मैं इस प्रदर्शनी के लिए दो बड़े वॉल हैंगिंग्स के साथ कुछ छोटे फ्रेम भी लाया था। मैं अपनी सबसे बड़ी और विशेष वॉल हैंगिंग को 55,000 रुपये में बेचने में सफल रहा।”

अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन, डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा,
“साथवरो अदाणी फाउंडेशन की सबसे नई पहलों में से एक है। हमें बहुत खुशी है कि हमने साथवरो मेले का दूसरा संस्करण आयोजित किया, जिसमें 80 से अधिक शिल्पकारों ने भाग लिया। इस पहल के पीछे का उद्देश्य भारत की विलुप्त होती कला और शिल्प को प्रोत्साहित करना, उन्हें बढ़ावा देना और पुनर्जीवित करना है। मुझे यह देखकर खुशी होती है कि हमारा शिल्पकार समुदाय अधिक रचनात्मक और बाजार-उन्मुख होता जा रहा है। वे सक्रिय रूप से हमारे पास आकर अपने काम को बढ़ावा देने की पहल कर रहे हैं। हर कला की अपनी एक अनूठी पहचान होती है, और एक कलाकार अपनी कला को जीवित रखने के लिए बहुत दर्द और विचार प्रक्रिया से गुजरता है। साथवरो के माध्यम से, हम उस कला और सांस्कृतिक धरोहर के पुनरुद्धार में योगदान दे रहे हैं, जिसके पीछे मेहनत और बलिदान की लंबी कहानी है।”

प्रोजेक्ट साथवरो, अदाणी फाउंडेशन की एक पहल है, जो भारत की समृद्ध कला और शिल्प धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ शिल्पकारों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित है। यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के तहत आर्थिक विकास, आजीविका और सांस्कृतिक संरक्षण के उद्देश्यों के साथ मेल खाता है।

साथवरो, शिल्पकारों को आधुनिक डिज़ाइन, प्रोसेस इनोवेशन और बाज़ार से जोड़ने के जरिए सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथवरो मेला ने शिल्पकारों को उभरती बाज़ार की मांगों और ग्राहकों की गुणवत्ता अपेक्षाओं को समझने का अवसर प्रदान किया। इस ज्ञान के साथ-साथ वित्तीय लाभ उन्हें डिज़ाइन की सटीकता पर ध्यान केंद्रित करने और अपने शिल्प में उच्च गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रेरित करेगा।

You Might Also Like

छत्तीसगढ़ में रेत के अवैध परिवहन पर सख्त कार्रवाई, बेमेतरा में 6 हाइवा वाहन जब्त

एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत, आत्महत्या की आशंका… जांच में जुटी पुलिस

छत्तीसगढ़ में खैर लकड़ी तस्करी मामले का बड़ा खुलासा, दो कारोड़ से ज्यादा कैश जब्त

छत्तीसगढ़ को रेलवे की बड़ी सौगात…. रायपुर-रावघाट और रायपुर-कुरुद रूट पर चलेंगी तीन नई मेमू

मुख्यमंत्री साय से एशियन गेम्स के कांस्य पदक विजेता एथलीट अनिमेष कुजूर ने की मुलाकात

Om Prakash Verma September 21, 2024
Share this Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article अखिल भारतीय वेटलिफ्टिंग क्लस्टर का आयोजन 23 सितंबर भिलाई में… जुटे देशभर के पुलिस वेटलिफ्टर
Next Article आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने आधुनिक ग्राहकों के लिए लॉन्च किया मयूरा क्रेडिट कार्ड आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने आधुनिक ग्राहकों के लिए लॉन्च किया मयूरा क्रेडिट कार्ड

Ro.No.-14097/18

× Popup Image

Ro. No.-14093/1

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?