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58 साल पहले हुआ था बीएसएफ का उदय, जानिए क्यों पड़ी थी बीएसएफ के गठन की जरूरत… छत्तीसगढ़ में कैसा रहा इनका सफर

By Mohan Rao
Published: December 1, 2022
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बीएसएफ का स्थापना दिवस
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भिलाई। बीएसएफ के सीमान्त मुख्यालय रिसाली में गुरुवार को 58वां स्थापना दिवस मनाया गया। रिसाली स्थित महानिरीक्षक कार्यालय के प्रांगण में यहां के अधिकारी व जवानों के बीच स्थापना दिवस मनाया गया। इस दौरान आईजी इंदराज सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी ली और छत्तीसगढ़ में बीएसएफ की उपलब्धियों के बारे में बताया। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं आखिर बीएसएफ के गठन की जरूरत क्यों पड़ी।

देश के आजाद होने के बाद भारत-पाकिस्तान की सीमाओं पर राज्य आर्म्ड पुलिस बल के द्वारा सुरक्षा प्रदान किया जाता था। 9 अप्रैल 1965 को गुजरात के कच्छ के इलाके में पाकिस्तान की सेना द्वारा भारतीय सीमा की चौकियों पर हमला किया गया। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान से लगी सीमाओं की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले एक अलग बल की स्थापना करने का निर्णय लिया। इसके चीफ के रूप में के एफ रूस्तम को जिम्मा दिया गया।  के एफ रूस्तम ने 1 दिसंबर 1965 को विश्व के सबसे बड़ी सीमा सुरक्षा बल का गठन किया।

इसके गठन को आज 58 वर्ष पूरे हो चुके है। बीएसएफ भारत की पूर्वी सीमा पर बांग्लादेश बॉर्डर के साथ उत्तरी पूर्वी राज्यों में काउन्टर इंसर्जेंसी ऑपरेशन को भी अंजाम दे रही है तथा पश्चिमी सीमा पर अडिग एवं दृढ़ निश्चय के साथ रात दिन अपनी डयूटी कर रहा है। इसके अलावा देश के अन्दर होने वाले प्रकृतिक आपदायें, नक्सल समस्या, देश एवं विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनाव के दौरान भारत सरकार द्वारा दी गयी हर जिम्मेदारी को दृढता के साथ निभाते हुए हर कदम पर अपनी वीरता का परिचय दिया है। बीएसएफ न सिर्फ देश के बाहरी दुश्मनों से लोहा लेती है बल्कि जरूरत पड़ने पर देश के भीतर घुसे देशद्रोहियों को भी कुचलने में अपनी जान की परवाह नही करता है।

2009 में छत्तीसगढ़ पहुंची बीएसएफ
आईजी इंदरराज सिंह ने बताया कि 2009 में छत्तीसगढ़ में आंतरिक समस्या से जूझने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को कांकेर जिला में तैनात किया गया। कांकेर के अति बीहड़ो एवं दूरस्थ ग्रामीण तथा जंगली इलाके में बीएसएफ की टुकडियाँ कठिनाईयों से लड़ते हुए तैनात हुई। धीरे-धीरे गांव वालों का भरोसा जीतने में बीएसएफ ने कामयाबी हासिल की फलस्वरुप लोंगो के दिल में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) जिला कांकेर के अतिसंवेदनशील इलाके में सरकार द्वारा किये जा रहे विकास कार्यों जैसे सड़क निर्माण कार्य, माइनिंग प्रोजेक्ट, रेल प्रोजेक्ट तथा मोबाईल टॉवर निर्माण कार्यो में सुरक्षा प्रदान कर रही है।

एक ओर जहां बीएसएफ के जवान अपनी जान की बाजी लगाकर देश को नक्सल मुक्त बनाने में लगे है वही दूसरी ओर समाज एवं प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए कांकेर  के दूरदराज में फैले गांवों में गरीबों एवं विद्यार्थियों को जरूरत की चीजें मुहैंया कराना, गांव को गोद लेना, मुफ्त चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करना, बेरोजगार युवाओं को स्किल डेवलपमेन्ट प्रोग्राम के तहत रोजगार प्रशिक्षण देना, ट्राइबल यूथ प्रोग्राम के तहत आदिवासी बच्चों को भारत भ्रमण में ले जाना और प्रदेश की संस्कृति को देश के समक्ष रखना इत्यादि कार्य करके उनका जीवन स्तर बढ़ा रहे है।

नक्सली समस्या से लड़ने के लिये छत्तीसगढ़ में फ्रन्टीयर मुख्यालय स्पेशल आप्रेशन सीमा सुरक्षा बल की तैनाती एक सेक्टर एवं 06 बटालियन के साथ दिनांक 07 फरवरी 2013 को हुई थी। आज यहां एक फ्रंटियर, 02 सेक्टर एवं 08 बटालियन तैनात है। बीएसएफ ने छत्तीसगढ़ में अपने कठिन प्रयासो के फलस्वरूप कांकेर जिले में सक्रिय 106 हार्डकोर नक्सलियों को आत्मसमर्पण कराकर देश की मुख्यधारा में जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। 11 दुर्दान्त नक्सलियों को मार गिराया तथा 1082 नक्सलियों को गिरफ्तार किया और 543 से अधिक आईईडी (जिन्दा बम्ब) की बरामदगी कर सुरक्षा बलों एवं आम जनता को भारी नुकसान होने से भी बचाया है।

इसके अलावा बीएसएफ ने छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित इलाके में कठिनाईयों से लड़ते हुए, 2013 एवं 2018 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव, 2014 एवं 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान नक्सलियों के किये गये विरोध के बावजूद बीएसएफ ने अतिसंवेदनशील नक्सल प्रभावित इलाके में शांतिपूर्ण मतदान कराने में कामयाबी हासिल की है। वर्तमान में बीएसएफ ने नक्सलियों पर शिकंजा कसने के लिए आपरेशन तेज कर दिये है तथा नक्सलियो को मुख्यधारा मे लाने की कोशिश कर रही है।

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